सुबह 6 से 8 बजे तक जिम करना। 11 बजे से 2 बजे तक टेक्निक प्रैक्टिस और पावर स्ट्रेंथ और स्टेमिना की प्रैक्टिस। फिर शाम को 6 से 10 बजे तक चार कक्षाएं लगती हैं उसमें जूडो, गिरना-पड़ना, थ्रोइंग (ऊपर से उठाकर पटकना), फाइट इत्यादि करवाई जाती है। इसके अलावा बच्चों के बीच आपस में फाइट करवाई जाती है। जो बच्चे अच्छा करते हैं, उन्हें उनसे ज्यादा वेट वाले बच्चों के साथ प्रैक्टिस कराई जाती है।
कोच की राय
हर्ष के कोच समुंदर टोकस कहते हैं कि उनकी लगन और मेहनत जरूर उसे एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी। कोच ने कहा कि हर्ष में सीखने की जबर्दस्त ललक है। कुछ बच्चे ऐसे हैं जो प्रैक्टिस के बाद घर चले जाते हैं, लेकिन हर्ष दूसरे बच्चों को भी गौर से प्रैक्टिस करते देखते रहते हैं। यही वजह है कि आज वह बाकियों से काफी आगे निकल चुके हैं।
हर्ष ने कहा कि 'मैने शौकिया तौर पर जूडो खेलना शुरू किया था। पहले कभी सोचा नहीं था कि इस खेल से मुझे करियर बनाने में भी मदद मिल सकती है। हमारी अकैडमी में ही प्रैक्टिस करने वाली पिंकी दीदी ने जब एशियन गेम्स में सिल्वर जीता तो मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया। मैं अपने कोच का आभारी हूं कि उन्होंने मुझमें भरोसा जताया और मुझे इस लायक बनाया कि मैं अब भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता हूं।'