दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स और गुआंग झू एशियाई खेलों में देश को पहली बार पदक दिलाकर आसमां सरीखी बुलंदियां छूने वाले प्रयागराज के अर्जुन अवार्डी जिम्नास्ट आशीष कुमार के लिए इन पदकों के बदले हासिल की गई ईनामी राशि सोमवार को वरदान बन गई। किसी से भी मदद नहीं मिलने पर आशीष ने इन खेलों की ईनामी राशि दांव पर लगाई और ओलंपिक क्वालिफाइंग विश्व चैंपियशिप की टीम में चयन को पोलैंड, उक्रेन तैयारियों के लिए निकल गए।
आईजी स्टेडियम में ट्रायल के बाद आशीष ने टॉप पर रहते हुए टीम में जब चयन पाया तो उनके दिमाग से एक बड़ा बोझ उतर गया था। वह अब ओलंपिक में उतरने के अपने सपने को पूरा करने के लिए विश्व चैंपियनशिप में खेल सकेंगे।
आशीष ने अमर उजाला से बातचीत में खुलासा किया कि उनके पास कोई चारा नहीं था। टॉप्स से वह बाहर किए जा चुके थे। कोई नेशनल कैंप लगा नहीं था। ओलंपिक का टिकट हासिल करने के लिए सबसे अच्छा मौका स्टुटगार्ट में अगले माह होने वाली विश्व चैंपियनशिप के जरिए था।
यही कारण था कि वह अपने कोच मनोज राणा और विश्व कप में वॉल्ट का मेडल जीतने वाली साथी जिम्नास्ट अरुण बुद्धा रेड्डी के साथ पोलैंड और उक्रेन रवाना हो गए। पोलैंड में उन्होंने जाने माने कोच आंद्रे लेविट के संरक्षण में तैयारियां कीं। लेविट वही कोच हैं जो भारत आने वाले थे, अनुबंध में देरी के चलते वह भी हाथ से निकल गए।
आशीष खुलासा करते हैं कि उनके पास दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों में जीते गए पदक के बदले मिले कैश अवार्ड का कुछ पैसा बचा था। उन्होंने तकरीबन आठ लाख रुपये निकाले और जाने का फैसला लिया। अरुणा ने भी अपनी जेब से पैसा खर्च किया।
आशीष कहते हैं कि पैसे का गम नहीं है, लेकिन अच्छी बात यह है कि उनका और अरुणा दोनों का टीम में चयन हो गया है। दोनों अब ओलंपिक का टिकट हासिल करने की कोशिश करेंगी। आज तक कोई पुरुष जिम्नास्ट ओलंपिक में नहीं खेल सका है।
दीपा का ओलंपिक में खेलना मुश्किल
ओलंपिक में खेलने वाली एकमात्र जिम्नास्ट दीपा कर्माकर आज हुए ट्रायल में चोटिल होने केचलते नहीं खेल सकीं। अब अगर वह वापसी करती हैं तो उनका ओलंपिक क्वालिफाई करना टेढ़ी खीर होगा। विश्व चैंपियनशिप के बाद होने वाले क्वालिफाइंग में गोल्ड जीतने होंगे। आज ट्रायल के बाद विश्व चैंपियनशिप की टीम में आशीष के अलावा योगेश्वर सिंह, आदित्य राणा, परिणीति नायक, परिणीति दास और अरुणा रेड्डी का चयन हुआ है।