भारतीय फुटबॉल टीम ने 11 साल बाद एक बार फिर सुनहरी सफलता हासिल कर खुद को एशिया का सिरमौर साबित किया। दक्षिण कोरिया के खिलाफ पहला मुकाबला 0-2 से हारने के बाद भारतीय टीम ने जबरदस्त वापसी कर न सिर्फ फाइनल में जगब बनाई बल्कि दक्षिण कोरिया के खिलाफ 2-1 से हराकर हिसाब बराबर भी किया। यह भारत का फुटबॉल में दूसरा पीला तमगा था। 1951 में अपनी मेजबानी में भी उसने सोना जीता था। वालीवॉल में जापान को हराकर भारत को रजत से ही संतोष करना पड़ा।
400 मीटर में मिल्खा ही बादशाह
मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की दौड़ में बादशाहत बरकरार रखी। उन्होंने चार गुणा चार सौ मीटर रिले में भी गेम्स रिकॉर्ड के साथ पीला तमगा जीता। इसके अलावा तरलोक सिंह ने 10 हजार मीटर की दौड़, मोहिंदर सिंह 1500 मीटर और गुरचरण सिंह रंधावा डेकाथलान के चैंपियन बने। पहलवानों ने तीन स्वर्ण तो मुक्केबाजों में पदम बहादुर ने पीला तमगा जीता। भारतीय हॉकी टीम को फाइनल में एक बार फिर पाक से हारकर रजत से ही संतोष करना पड़ा। फाइनल तक एक भी न गोल खाकर रहने वाली भारतीय टीम पाक से 0-2 से हार गई।
इस्त्राइल व ताइवान को वीजा नहीं
इस्त्राइल और ताइवान के खिलाड़ी इस खेल में हिस्सा नहीं ले सके। अरब देशों और चीन के दबाव के चलते इंडोनेशिया सरकार ने इनके प्रतिनिधियों को वीजा देने से इनकार कर दिया। हालांकि, उसे सभी सदस्य दोशों के आमंत्रित करना था।बैडमिंटर को पहली बार शामिल किया गया।
एशियन गेम्स 1962, जकार्ता (24 अगस्त से 04 सितंबर तक)
देश-14, खेल- 16, खिलाड़ी-1460, स्पर्धाएं-123