जकार्ता एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के बाद फवाद को उस वक्त झटका लगा जब उनका प्रिय घोड़ा मेडीकॉट जख्मी हो गया। उन्होंने दो अन्य घोड़े फर्नहिल और टचिंगवुड के सहारे ओलंपिक कोटा हासिल किया।
उनके पिता हासनैन मिर्जा के अनुसार ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन के लिए फवाद को मेडीकॉट जैसे घोड़े की जरूरत है। मेडीकॉट अब ठीक हो रहा है, लेकिन विरमानी ने फवाद को एक अन्य जर्मन घोड़ा दयारा हाल ही में दिलाया है। इसकी कीमत ढाई करोड़ रुपये है।
दयारा और मेडीकॉट को ओलंपिक में उतराने के लिए दो चार स्टार के कंपटीशनों में खेलकर मिनिमम एलिजबिलिटी रिक्वायरमेंट (एमईआर) दिलाना है। फवाद के सामने अभी चुनौती उनकी और घोड़ों की फिटनेस के अलावा इन्हें एमईआर दिलाने की है। इन कंपटीशनों को खेलने के बाद जुलाई में यह फैसला लिया जाएगा कि वह ओलंपिक में किस घोड़े का इस्तेमाल करेंगे। फवाद जर्मनी में घोड़ों की देखभाल खुद करते हैं।
टॉप्स के लिए करेंगे आवेदन : हासनैन के मुताबिक फवाद को टॉप्स में शामिल कराने के लिए अब आवेदन किया जाएगा। ओलंपिक के लिए किसी भी तरह की मदद उसके लिए फायदेमंद रहेगी।