दंगल में पहलवान की हार्ट अटैक से मौत
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पहलवानों की ओर से नौकरी हासिल कर फर्जी प्रमाण पत्र लगाने का मामला सामने आया है। सेना में नौकरी हासिल करने के लिए कई पहलवानों ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने के फर्जी प्रमाण पत्र लगाए। सेना की ओर से जब इन प्रमाण पत्रों की छानबीन के लिए भारतीय कुश्ती संघ को भेजा गया तो ये फर्जी पाए गए। कुश्ती संघ ने इन पहलवानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए कमर कस ली है, लेकिन इन प्रमाण पत्रों को बनाने वाले रैकेट का अब तक पर्दाफाश नहीं हो सका है।
कुश्ती संघ का कहना है कि उनकी कोशिश यही है कि किसी तरह फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया जाए। यह पहला मामला नहीं है जब पहलवानों की ओर से फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने की कोशिश की गई है। यही कारण है कि इस बार कुश्ती फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वाले पहलवानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने जा रहा है। जिसमें संघ को उम्मीद है कि यह गोरखधंधा करने वाले रैकेट का पर्दाफाश हो जाएगा।
कुश्तीसंघ के सहायक सचिव विनोद तोमर का कहना है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए योग्य पहलवानों का हक छीना जा रहा है। गोआ के सत्यम शुक्ला, पीयूषकांत यादव, अभिषेक सिंह, यूपी के मुकुल सहरावत, अभिषेक चौधरी की ओर से जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने या फिर पदक जीतने के फर्जी प्रमाण पत्र लगाए गए हैं। इन सभी प्रमाण पत्रों को भारतीय कुश्ती संघ की ओर से जारी किया गया दिखाया गया है।