लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता और पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन महिला बॉक्सर एमसी मैरीकॉम का कहना है कि उनका हर पदक संघर्ष की कहानी है। लेकिन उनका पांचवां एशियाई चैंपियनशिप स्वर्ण पदक सबसे खास है क्योंकि कई अड़चनों के बाद यह उनकी झोली में आया। इस दौरान वह पिछले एक साल से रिंग से बाहर रही थी।
मैरीकॉम ने बुधवार को भारतीय बॉक्सिंग में एक और इतिहास लिख दिया। वियतनाम के हो चिन मिन्ह सिटी में हुई एशियाई चैंपियनशिप में अपना पांचवां स्वर्ण पदक जीता और यह कारनामा करने वाली वह पहली महिला बॉक्सर बनी। उन्होंने 48 किलो लाइट फ्लाइवेट वर्ग के फाइनल में उत्तर कोरिया की किम हयांग मि को एकतरफ मुकाबले में 5-0 से शिकस्त दी।
और पढ़ें...मैरी कॉम का 'गोल्डन पंच', एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने पर पीएम मोदी ने दी बधाई
इस जीत के बाद राज्यसभा सांसद मैरीकॉम ने कहा, ‘सभी पदकों की तरह यह पदक मेरे लिए खास है। इस पदक जीत में एक अपनी संघर्ष की कहानी है। हर पदक, जिसे मैंने जीता है, कठिन संघर्ष की यात्रा को बयां करता है। यह पदक मेरे सांसद बनने के बाद आया है और इसकी मुझे उम्मीद थी। इससे मेरा कद बढ़ेगा और मै प्रोत्साहित भी हूं। आग भी मेरा कद बढ़ता रहेगा।’
35 वर्षीय राज्यसभा सांसद बॉक्सर शीर्ष पर पहुंचने के बाद भी आमजीवन में सक्रिय हैं। वह इंफाल में अपने पति ओनलेर कॉम के साथ अपनी एकेडमी चलाती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं एक सांसद के तौर पर सक्रिय रही हूं। मैंने नियमित रूप से संसदीय कार्यवाही में हिस्सा ले रही हूं और इस सबके व्यस्तता के बावजूद मैंने इस चैंपियनशिप के लिए कड़ी मेहनत की। जब से मैं सरकारी ऑब्जर्बर बनी हूं, मैंने स्पोर्ट्स स्तर पर कई बैठक की हैं। मुझे उम्मीद है कि लोग इसे समझ रहे होंगे कि यह कितना कठिन है। मैं कई भूमिका को निभा रही हूं। मैं मां भी हूं। मेरे तीन बेटे भी हैं, उनकी देखभाल भी करती हूं।’