हाल ही में लंदन में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने वाले भाला फेंक के एथलीट दविंदर सिंह कंग ने दावा किया है कि भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने उन्हें विश्व चैंपियनशिप से हटने के लिये कहा था क्योंकि वह डोपिंग आरोपों का सामना कर रहे हैं लेकिन एएफआई ने इसे कोई मुद्दा नहीं कहकर खारिज कर दिया और कहा कि वह देश को शर्मसार होने से बचाने के लिये ऐसा करना चाहता था।
लंदन में पिछले सप्ताह विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले भाला फेंक के पहले भारतीय एथलीट बने कंग को 15 मई को इंडियन ग्रां प्री के दौरान नाडा के प्रतियोगिता के दौरान परीक्षण में मारिजुआना के सेवन का दोषी पाया गया था। उन्हें अस्थायी तौर पर निलंबित किया गया था क्योंकि वाडा नियमों के तहत यह अनिवार्य नहीं है।
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कांग ने पीटीआई से कहा, ‘‘जिस दिन मैं लंदन रवाना हो रहा था, एएफआई के एक अधिकारी ने मुझसे विश्व चैंपियनशिप से हटने के लिये कहा। उन्होंने कहा कि आईएएएफ परीक्षण करेगा और मुझे प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। लंदन में भी क्वालीफाईंग दौर से ठीक पहले मुझे इसी आधार पर प्रतिस्पर्धा भाग नहीं लेने के लिये कहा गया।" उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता था कि क्या करूं। मैं अपने कमरे में रो रहा था लेकिन कुछ लोगों से सलाह लेने के बाद मैंने प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने का फैसला किया और भाला फेंक के फाइनल में पहुंचने वाला पहला भारतीय बना। ’’ एएफआई ने हालांकि कांग के दावे को खारिज कर दिया। अध्यक्ष आदिल सुमरिवाला ने कहा कि महासंघ के पास उन्हें हटने के लिये कहने का अधिकार था। उन्होंने कहा कि एएफआई देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर शर्मसार होने से बचाने के लिये ऐसा किया था।
सुमरिवाला ने कहा, ‘‘उसे (कांग) को मारिजुआना के सेवन का दोषी पाया गया था। इसके लिये अनिवार्य निलंबन नहीं है और इसका फैसला एथलीट को करना होता है। नाडा ने हमें उसकी नाडा पैनल के सामने उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिये कहा था। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने उससे (कांग) से अस्थायी निलंबन का विकल्प अपनाने के लिये कहा था और नियमों के तहत हमारे पास ऐसा अधिकार है। इसके अलावा हमारा मानना था कि उसका मामला नाडा के अंतर्गत ही रहे। ’’