फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेशर्मी की हद! देश का मान बढ़ाने वाले ये खिलाड़ी फर्श पर सोने को मजबूर

Wed, 30 Jan 2019 12:00 PM IST
अभिषेक निगम स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
CYCLE
विज्ञापन

खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ अक्सर कहते हैं कि खिलाड़ी को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, ऐसा लगता है कि इस लक्ष्य को हासिल करने से पहले भारत को लंबा सफर तय करना है। इसका उदाहरण आगामी राष्ट्रीय साइक्लिंग चैंपियनशिप्स से मिला, जो जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम के वेलोड्रम में बुधवार से आयोजित होना है। 

विज्ञापन


साइक्लिस्ट को जिस घर में जगह दी गई है, उसके लिए 'दयनीय' शब्द का इस्तेमाल करना भी कम है। राजस्थान पुरुष टीम के 30 साइकलिस्टों को वेलोड्रम स्टैंड्स के नीचे एक 30 x 20 फीट के हॉल में रोका गया है। 

सबसे बुरी बात यह है कि इतनी ठंड होने के बावजूद साइक्लिस्टों को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। हॉल में एक भी बिस्तर नहीं है। एक साइक्लिस्ट ने स्वीकार किया कि साइक्लिस्टों को जमीन पर बिछाने के लिए गद्दे दिए गए हैं। यहां मौसम के हालात ऐसे हैं कि 10 डिग्री से कम तापमान जा रहा है। साइक्लिस्टों को रात में बड़ी परेशानी हो रही है, लेकिन उन्हें मैनेज करना पड़ रहा है।

विज्ञापन
Trending Videos

राजस्थान साइक्लिंग एसोसिएशन जो कि नव गठित संस्था है, के आयोजकों ने अपनी बेबसी व्यक्त की है। अधिकारियों ने कहा, 'हमारे पास यही है।' यह सही भी है। इन्हें आर्थिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों को 75 लाख रुपए के बजट को जुटाने के लिए अपनी निजी तिजोरी से पैसा निकालना पड़ रहा है। उन्हें इसी रकम में से वेलोड्रम का सुधार कार्य भी कराना है, जिसका दो दशक में दुर्लभ ही उपयोग हुआ है। भारत के साइक्लिंग संघ ने इन्हें पांच लाख रुपए दिए हैं और पांच लाख रुपए देने का भरोसा दिलाया है। राज्य खेल मंत्री अशोक चंदना ने भी इतनी ही रकम दी है और मुख्यमंत्री फंड से 10 लाख रुपए देने का विश्वास दिया है।

यह हाल सिर्फ मेजबान का नहीं। अधिकांश अन्य टीमों को भी इस तरह के हॉल में ही जगह मिली है। महाराष्ट्र की पुरुष टीम को छोटे हॉल में ठहराया गया है क्योंकि उनकी टीम में 22 सदस्य हैं।

महाराष्ट्र के एक साइक्लिस्ट ने कहा, 'हमें इतनी ठंड की आदत नहीं है। हमें नहाने के लिए गर्म पानी भी नहीं मिल रहा।' कोई भी साइक्लिस्ट डर के कारण अपना नाम नहीं बताना चाह रहा। उन्होंने कहा, 'अगर पता चला कि हमने शिकायत की है तो हमारा चयन रोका भी जा सकता है।'

सर्विसेज और रेलवे विभाग की टीमों को हालांकि परेशानी नहीं हैं क्योंकि वह अपनी सुविधाओं के मुताबिक अपने खर्चे पर रूकी हैं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी गई है और उन्हें होटल में ठहराया गया है। 

हालांकि, उन्हें जल्दी उठना पड़ता है ताकि अपने साथियों से जुड़ सके। महाराष्ट्र टीम में दो अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट साइक्लिस्ट शामिल हैं। मयूर पवन (एशियन चैंपियनशिप, 2017) और अभिषेक कासिथ (एशिया कप, 2017)।

इन साइक्लिस्टों ने कहा, 'हम बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन यह अच्छा होता अगर पूरी टीम होटल में ठहरती।' अधिकारियों ने साइक्लिस्ट के होटल में नहीं रूकने की वजह बताई।
विज्ञापन

आयोजन सचिव रितेश चौधरी ने कहा, 'कई होटल ने कमरे में साइकिल रखने से इंकार कर दिया और ये ऐसे एथलीट्स हैं, जो एक पल भी साइकिल को अपनी नजरों से दूर रखना पसंद नहीं करते।' खिलाड़ियों ने कोट्स की गुजारिश की, लेकिन वह गद्दों से खुश हैं। जब इस बारे में कहा गया तो साइक्लिस्ट्स मुस्कुराए।

मुकेश कुमार ने अब तक 6 राष्ट्रीय मेडल जीते हैं। उन्होंने इस बात से सहमति जताई कि साइकिल से दूर रहना कभी विकल्प में ही नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमारी साइकिल करीब 5 लाख रुपए की होती है और उसमें किसी प्रकार का नुकसान नहीं झेल सकते। एक जरा सी खरोच (स्क्रैच) भी सहन नहीं। बता दें कि मुकेश को साइकिल उनके किसान पिता और स्कूल में पढ़ाने वाली मां ने काफी संघर्ष के बाद दिलाई है।

देव किशन शरण ने एशिया कप में दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। वह कहते हैं कि अगर मुझे साइकिल रखने की पर्याप्त सुविधा मिले, तो मैं अपनी साइकिल कमरे से दूर वहां रख सकता हूं। हालांकि, रखने की सुविधा उम्मीद के मुताबिक नहीं मिली है। अब देखिए न, राजस्थान के 30 साइक्लिस्टों के अलावा हॉल में 20 साइकिल भी तो ठहरी हुई हैं। शरण तो मंगलवार अपने रिश्तेदार के घर रूकने गए।

महाराष्ट्र की लड़कियों को भी लड़कों के समान जगह वाले हॉल में ठहराया गया हैं। हालांकि, छह सदस्यीय टीम को जगह की कोई परेशानी नहीं है। उनकी परेशानी बाथरूम है, जो थोड़ी दूर बना है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें