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Chess Olympiad: पीएम मोदी ने सौंपी मशाल, कहा- 2024 और 2028 ओलंपिक को लक्ष्य बनाकर हो रहा काम

Mon, 20 Jun 2022 12:14 AM IST
रोहित राज अमर उजाला ब्यूरो

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंदिरा गांधी स्टेडियम में चेस ओलंपियाड की मशाल की शुरूआत की। उन्होंने मशाल पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को सौंपी। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंदिरा गांधी स्टेडियम में चेस ओलंपियाड की मशाल की शुरूआत की। उन्होंने मशाल पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को सौंपी। यह मशाल देश के 75 शहरों से होते हुए महाबलीपुरम पहुंचेगी, जहां 28 जुलाई से 44वें चेस ओलंपियाड का आयोजन हो रहा है। पीएम ने कहा कि उन्हें गर्व है कि शतरंज के इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट को उसके जन्म स्थान में आयोजित किया जा रहा है। चतुरंग के रूप में पूरी दुनिया में शतरंज भारत से फैला अब यहां से चेस ओलंपियाड की मशाल निकल रही है। 
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पीएम ने कहा कि खेलो इंडिया के जरिए प्रतिभाओं को न सिर्फ तलाशा जा रहा है बल्कि तराशा भी जा रहा है। इन खेलों के जरिए 2024 के पेरिस ओलंपिक और 2028 लॉस एंजेल्स ओलंपिक को लक्ष्य बनाकर काम किया जा रहा है।

फिडे अध्यक्ष ने दी पीएम को मशाल
पीएम को इस दौरान फिडे अध्यक्ष अर्केडी ड्वारकोविच ने मशाल सौंपी। पीएम ने कहा कि उन्हें खुशी है कि फिडे चेस ओलंपियाड की मशाल की शुरूआत भारत से की। यह भी खुशी की बात है कि अब जहां भी चेस ओलंपियाड होगा उसकी मशाल की शुरूआत भारत से होगी। 
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पीएम ने समारोह में मौजूद ओलंपियाड में भारतीय टीम के सदस्य कोनेरू हंपी, दिव्या देशमुख, विदित गुजराती से कहा कि महाबलीपुरम में जमकर खेलिएगा। उनकी जीत खेल भावना की जीत होगी। उन्होंने कहा कि इस बार ओलंपियाड में भारत की सबसे बड़ी टीम खेल रही है। उन्हें आशा है कि इस बार भारतीय टीम पदक केनए रिकार्ड बनाएगी। पीएम ने कहा कि देश ने कुश्ती, मलखंब जैसे खेल शारीरिक विकास के लिए दिए तो मानसिक विकास के लिए चतुरंग जैसे खेलों का अविष्कार किया।

टॉप्स, खेलो इंडिया चेस बोर्ड की ताकत की तरह कर रहे काम
पीएम ने कहा कि वह शतरंज के ज्यादा जानकार नहीं हैं, लेकिन वह यह जानते हैं कि इस खेल के पीछे छिपी भावना और इसके मायने बहुत गहरे होते हैं। शतरंज में हर मोहरे की ताकत होती है। उसकी ताकत का सही इस्तेमाल किया तो वह सबसे शक्तिशाली बन जाता है। यहां तक प्यादा जो सबसे कमजोर माना जाता है वह भी सबसे ताकतवार बन सकता है। बस जरूरत है सही चाल चलने की। यही चेस बोर्ड की ताकत हमें जीवन का बड़ा संदेश देती है। सही मदद मिल जाए तो मनचाहे नतीजे मिल सकते हैं। खेल के क्षेत्र में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) और खेलो इंडिया इसी सोच के साथ काम कर रहे हैं। इसके नतीजे भी दिख रहे हैं।

गांव, आदिवासी क्षेत्रों से खेलो इंडिया में तलाशी जा रही प्रतिभाएं
देश का युवा इस वक्त शतरंज के अलावा हर खेल में आगे बढ़ रहा है। ओलंपिक में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। पहली बार सात मेडल जीते, पैरालंपिक में पहली बार 19 मेडल जीते। सात दशकों में पहली बार थॉमस कप जीता। विश्व बॉक्सिंग में स्वर्ण और दो कांस्य जीता। नीरज ने कुछ दिन पहले ही नए राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण जीता। 

2024 के पेरिस ओलंपिक और 2028 लॉस एंजेल्स ओलंपिक को लक्ष्य बनाकर काम हो रहा है। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं। युवाओं में साहस और सामथ्र्य की कमी नहीं है। खेलो इंडिया इन प्रतिभाओं को खुद तलाश रहा है और तराश रहा है। गांव, आदवासी क्षेत्रों से प्रतिभाएं चयनित की गई हैं। नई शिक्षा नीति में दूसरे विषयों की तरह खेलों को प्रमुखता दी गई है। नई स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी खोली जा रही हैं।

देश से मशाल शुरू होना गर्व की बात : ठाकुर 
खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मशाल रिले भारत से शुरु होना गर्व की बात है। 1956 में भारत ने पहली बार चेस ओलंपियाड में भाग लिया था। आज यह भारत में हो रहा है, जिसमें 188 देश शिरकत करेंगे। फिडे अध्यक्ष ने मशाल रिले को दोस्ती, शांति, और ओलंपिक मूवमेंट का प्रतीक बताया।

पीएम ने हंपी से खेली शतरंज
पीएम ने महिला ग्रैंड मास्टर कोनेरू हंपी के साथ शतरंज खेली। उन्होंने हंपी को सफेद मोहरों से सेरीमोनियल चाल चली। भारतीय शतंरज महासंघ के अध्यक्ष डॉ. संजय कपूर ने पीएम को प्रतीक चिन्ह भेंट किया। मशाल पर वसुधैव कुटुम्बकम लिखा हुआ।
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