राष्ट्रमंडल खेलों में बॉक्सरों के कमरे के बाहर नीडिल मिलने के मामले में हुई फजीहत के बाद बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कड़ा कदम उठाते हुए भारतीय बॉक्सरों पर नो नीडिल पॉलिसी को लागू कर दिया है।
नेशनल कैंप में शामिल सभी बॉक्सरों पर अब यह पॉलिसी लागू रहेगा। कैंप में फेडरेशन की ओर से औचक निरीक्षण कराए जाएंगे। अगर किसी बॉक्सर केपास सिङ्क्षरज मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं आईओए अध्यक्ष नरेंदर बत्रा ने खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ से मांग की है कि इस पॉलिसी को सभी खेलों में लागू कर दिया जाए।
बीएफआई के अध्यक्ष अजय सिंह ने अमर उजाला से खुलासा किया कि जिस तरह का मामला गोल्ड कोस्ट में सामने आया उसे ध्यान में रखते हुए इस पॉलिसी को नेशनल कैंप में लागू करना जरूरी हो गया है। कैंप में बॉक्सरों को इसके बारे में जागरूक किया जाएगा।
पॉलिसी को लागू करने का मकसद यही है कि निकट भविष्य में इस तरह के खेलों में इन स्थितियों से बचा जा सके। फेडरेशन अध्यक्ष ने यह भी कहा कि गोल्ड कोस्ट में जिस तरह से मामला उछला उससे बचा जा सकता था।
सिङ्क्षरज के बारे में 24 घंटे के अंदर बताना होता, जब सिरिंज बरामद की गई तो छह ही घंटे हुए थे उस दौरान किसी को यह बात समझ में नहीं आई। बावजूद इसके उनके लिए यह मामला सबक है। यही वजह है कि वह कैंप में इस पॉलिसी को कड़ाई से लागू कर रहे हैं।
वहीं आईओए अध्यक्ष नरेंदर बत्रा ने बृहस्पतिवार को थामस बाख के समक्ष खुलासा किया कि उन्होंने खेल मंत्री से कहा है कि इस पॉलिसी को अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। किसी भी खेल के नेशनल कैंप में सिङ्क्षरज के रखने पर रोक लगा दी जानी चाहिए।