आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में हुई राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप देश की टीम में खेलने वाले बॉक्सरों की ओर से अनुशासनहीनता का मामला सामने आया है। गलत फैसले के विरोध में कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीत चुके इन बॉक्सरों ने पदक वितरण समारोह का बहिष्कार कर दिया।
खास बात यह है कि बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया है, लेकिन यह मामला साई और खेल मंत्रालय तक पहुंचा दिया गया है। यही नहीं चैंपियनशिप में देश के टॉप बॉक्सरों के लिए नहीं खेलने को भी साई ने गंभीरता से लिया है।
पुणे में हुई चैंपियनशिप में तीन बॉक्सरों के खिलाफ अनुशासनहीनता का मामला सामने आया है। इनमें से दो बॉक्सर कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीत चुके हैं। ये तीनों ही बॉक्सर भारतीय टीम के नियमित सदस्यों में से एक हैं। प्लस 91 किलो और 69 किलो में खेलने वाले इन बॉक्सरों का तर्क था कि उन्हें जीते हुए मुकाबले में हारा हुआ घोषित किया गया है।
उन्होंने इसका विरोध भी किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते इन बॉक्सरों ने पदक वितरण समारोह का बहिष्कार कर दिया। वहीं 60 किलो में खेलने वाले एक बॉक्सर के मामले में यह कहा जा रहा है कि चोट के चलते वह पदक वितरण समारोह में नहीं पहुंचा।
बीएफआई के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। वहीं साई और खेल मंत्रालय को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। बीएफआई से इस बारे में पूछताछ होगी और बॉक्सरों से अनुशासनहीनता का कारण पूछा जा सकता है। वहीं चैंपियनशिप में शिवा थापा, गौरव सोलंकी, अमित पंघाल और हुसामुद्दीन जैसे बॉक्सर नहीं खेले। साई ने इस बारे में बीएआफई से जवाब तलबी की है।