शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकार की तरह केंद्र सरकार खेलों का अधिकार बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस मुहिम में उसे अपनी ही पार्टी के राज्यों से पूरा समर्थन नहीं मिल रहा है। अब तक खेल राज्यों का विषय हैं इसे अपने अधिकार क्षेत्र में लेने के लिए खेल मंत्रालय इसे राज्य से समवर्ती (कॉन्करंट) सूची लाने के लिए जोर लगा रही है।
मंत्रालय को इस संबंध में बिल लाने के लिए 50 प्रतिशत राज्यों का समर्थन हासिल करने की जरूरत है, लेकिन देश के 15 राज्यों में भाजपा की या फिर उसके समर्थन की सरकार होने के बावजूद मंत्रालय यह आंकड़ा नहीं जुटा पाया है। हाल यह है कि भाजपा शासित गोआ और त्रिपुरा ने खेलों को राज्य सूची से हटाने से इंकार कर दिया है, जबकि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचाल प्रदेश, नागालैंड ने कोई जवाब नहीं दिया है।
खास बात यह है कि गैर भाजपा शासित राज्य कर्नाटक, आंध्र प्रदेश ने भी केंद्र सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए इस मुहिम को समर्थन दिया है। हालांकि भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, गुजरात, झारखंड, बिहार, असम ने भी इसे समर्थन दिया है, लेकिन गैर भाजपा राज्य पंजाब, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु ने इसे खारिज कर दिया है।
इस मुद्दे पर पांच बार जवाब मांगे जाने केबावजूद छत्तीसगढ़, अरुणाचाल, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, नागालैंड, उड़ीसा, राजस्थान, तेलंगाना, हरियाणा, दिल्ली, दमन दीव, लक्षद्वीव, दादर नगर हवेली ने कोई जवाब नहीं दिया है। हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर तो इस मुद्दे पर संसद में निजी बिल भी ला चुके हैं। उस वक्त खेल मंत्रालय ने इसे खारिज इसकी कमान खुद अपने हाथों में ले ली थी। हालांकि मंत्रालय की यह मुहिम तब तक सफल नहीं हो सकती है जब तक इसके पक्ष में कम से कम 50 प्रतिशत राज्य नहीं हों।
रक्षा, गृह समेत कई मंत्रालय पक्ष में
खेलों को समवर्ती सूची में लानेत के पक्ष में रक्षा, स्वास्थ्य, गृह जैसे मंत्रालय पक्ष में हैं। रेलवे बोर्ड, शहरी विकास स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा जैसे विभागों ने भी इसका समर्थन किया है। हालांकि नीति आयोग ने इस पर कुछ आपत्तियां दर्ज कर सलाहें दी हैं। कानून मंत्रालय से भी इस संबंध में बातचीत जारी है।