जकार्ता एशियाई खेलों में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले पहलवान बजरंग पूनिया ने एक बार फिर देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। ताजा विश्व रैंकिंग में बजरंग ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल भारवर्ग में नंबर वन रैंकिंग हथिया ली।
पहलवानों की विश्व रैंकिंग को लेकर यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) ने सूची जारी की जिसमें बजरंग को शीर्ष स्थान मिला। इससे पहले वह तीसरे स्थान पर थे। बजरंग के अब 96 अंक हो गए हैं। उनके बाद 66 अंक के साथ क्यूबा के पहलवान है।
बजरंग पूनिया को कुश्ती विरासत में मिली है। उनके पिता बलवान पूनिया भी एक पहलवान थे, लेकिन पैसों तंगी और खराब हालातों के चलते उन्हें कभी खुद को साबित करने का मौका नहीं मिला। परिवार के खस्ता हालात तब भी बरकरार रहे जब बजरंग पहलवानी सीख रहे थे, लेकिन पिता ने अपनी तरह बेटे के अरमानों को बलि नहीं चढ़ने दी।
ऐसा बताया जाता है कि बजरंग के पिता ज्यादा रुपया खर्च न हो इसलिए बस या ऑटो की जगह साइकिल से सफर तय करते थे। यह पैसा वह सिर्फ इसलिए बचाते थे ताकि पहलवानी सीख रहे बजरंग को अच्छी डाइट मिल सके। बजरंग को घी और दूध समय पर मिल, इसके लिए परिवार ने कई सालों तक अपने हालातों से समझौता किया।