बीते वर्ष विश्व चैंपियनशिप में रजत जीतने वाली जापानी मायो मुकेदा एक बार फिर विनेश पर भारी पड़ गईं। इस बार भी उनका पहला मुकाबला मुकेदा से पड़ गया। पिछले दो मुकाबलों में एक भी अंक नहीं करने वाली विनेश के हिस्से यहां 2-6 से हार आई। हालांकि मुकेदा यहां भी स्वर्ण नहीं जीत पाईं उन्हें कजाखस्तान की तात्याना अखयेनोवा ने 8-2 से फाइनल में हराया। विनेश ने कांसे की लड़ाई में वियतनाम की थी जी कियू को 10-0 से हराया। विनेश ने स्वीकार किया कि मुकेदा इस बार काफी तैयारी करकेआईं थीं। उन्हें ऐसा दांव मारा जिसकी भनक उन्हें नहीं थी। मुकेदा उन्हें अच्छा करने की प्रेरणा दे रही हैं। उनके दिमाग में यही रहता है कि अगली बार इस पहलवान को जरूर हराना है।
साक्षी की शुरुआत अच्छी नहीं रही। जापानी नाओमी रुइके ने 2-1 से हराया। राउंड रोबिन के आधार पर यहां हुए मुकाबलों में साक्षी ने पहले कोरियाई ओ ह्यूंग को 14-4 और बाद में उज्बेकिस्तान की नबीरा को 5-4 से हराकर फाइनल में जगह बनाई, जहां उन्हें नाओमी ने एक बार फिर 0-2 से पराजित किया। अंशु मलिक को पहले स्वर्ण जीतने वाली रिसाको काबाई ने 0-10 से परास्त किया। कांस्य की लड़ाई में उन्होंने उज्बेकिस्तान की सेवारा को 4-1 से हराया। सोनम को पहले जापानी युकाको काबाई ने 2-5 से हराया। इसके बाद वह कांस्य की लड़ाई किर्गिस्तान की एइसुलु से 0-11 हार गईं।
पति से अलग होने के बाद बेटी के लिए वापस मैट पर उतरने वाली गुरशरणप्रीत ने जैसे ही कांस्य पदक जीता कोच कुलदीप मलिक से गले लगकर फफक-फफक कर रों पड़ीं। उन्होंने मंगोलिया की एंखबयार को 5-2 से हराकर कांस्य जीता। दरअसल गुरशरण के लिए यह पदक बेहद खास है। बेटी को पालने के लिए उन्हें छह साल बाद एक बार फिर कुश्ती को अपनाना पड़ा। 2011 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में रजत जीतने वाली गुरशरण ने वापसी के बाद नेपाल में हुए दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। गुरशरण भी मानती हैं कि यह पदक उनके लिए बेहद खास है।