फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रैंकिंग आठ, फिर भी एशियाड से बाहर!: पैरा शटलर प्रेमा विश्वास ने लगाया भेदभाव का आरोप, पीएम मोदी से लगाई गुहार

Sun, 13 Sep 2026 02:43 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी प्रेमा विश्वास ने आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि बेहतर रैंकिंग के बावजूद उनकी एंट्री में देरी हुई, जिसके कारण उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। प्रेमा ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की है।
विज्ञापन
प्रेमा - फोटो : IANS
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत की इंटरनेशनल पैरा-बैडमिंटन शटलर प्रेमा विश्वास ने एक भावनात्मक सार्वजनिक अपील जारी की है। उन्होंने कहा कि जापान में होने वाले आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स के लिए उनकी आधिकारिक एंट्री में जानबूझकर देरी की गई और उन्हें जगह नहीं दी गई।  
विज्ञापन


प्रेमा विश्वास ने सोशल मीडिया पर की गई अपील में इस मामले में पीएम मोदी से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। डब्ल्यूएच1 श्रेणी की एथलीट ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि एशियन एकल रैंकिंग आठ और महिला डबल्स में टॉप 6 रैंक होने के बावजूद, उनसे पहले कम रैंक वाली खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया गया।

प्रेमा ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'मेरी एकल एशियन रैंकिंग 8 है और मैं महिला डबल्स में टॉप छह में हूं। फिर भी आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स के लिए मेरी एंट्री शुरू में नहीं भेजी गई। जब इसे आखिरकार भेजा गया, तो इसमें इतनी देर हो गई कि अब इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसमें मेरी क्या गलती है?'
विज्ञापन


इस प्रोसेस में अंतर को बताते हुए, प्रेमा ने पूछा कि जब एकल कैटेगरी में 11वीं रैंक तक के शटलर्स की एंट्री की गई तो उनकी वर्षों की मेहनत पर क्यों असर पड़ रहा है। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर की रहने वाली पैरा-शटलर ने लिखा, 'इसमें मेरी क्या गलती है? जब एकल में 11वीं रैंक तक के खिलाड़ी के लिए एंट्री दाखिल की गईं, तो मेरी एंट्री क्यों छोड़ दी गईं, जबकि मेरी एकल रैंक 8 और महिला डबल्स टॉप 6 थी? मुझे अपनी वर्षों की मेहनत और रैंकिंग का नुकसान क्यों उठाना चाहिए?'

अपनी निजी और वित्तीय मुश्किलों के बारे में शटलर ने कहा, 'मैं एक वंचित बैकग्राउंड से आती हूं। मैंने अपने पिता को खो दिया है। अभी मेरे पास कोई नियमित नौकरी या किसी भी तरह का सहयोग नहीं है। मैं लोगों से मदद मांगकर, बहुत मुश्किल हालात में ट्रेनिंग करके और अपने देश को रिप्रेजेंट करके इस लेवल तक पहुंची हूं। यह मेरे लिए कोई आम टूर्नामेंट नहीं है। यह मेरे करियर का पहला और शायद आखिरी एशियन पैरा गेम्स है। मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं वर्षों तक ऐसे खेलती रहूं और इस रैंकिंग को फिर से बना सकूं।'

पीएम मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए प्रेमा ने कहा, 'मैं कोई फेवर नहीं मांग रही हूं। मैं बस इंसाफ मांग रही हूं। मैं बस अपने देश के लिए खेलने का एक मौका मांग रही हूं।' प्रेमा ने इजिप्ट पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 में दो कांस्य पदक जीते, यह टूर्नामेंट पैरा-एशियन गेम्स सिलेक्शन रैंकिंग का हिस्सा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें