दिव्या ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के सामने अपनी नाराजगी प्रकट की। उन्होंने कहा, 'हम भले ही गरीब हैं, लेकिन हमारे हौसले बुलंद हैं। हमारे अंदर कुछ कर गुजरने की ज्वाला है। मैं आज पानी में भी पहलवानी कर रही हूं। अगर लोगों का समर्थन मिला तो निश्चित ही नतीजे बहुत अच्छे मिलेंगे। नए बच्चों को मदद की जरूरत है। हरियाणा को ज्यादा मेडल इसलिए मिलते हैं क्योंकि उन्हें समर्थन हासिल है। अगर हमें भी समर्थन मिले तो इतनी क्षमता है कि सबसे ज्यादा मेडल दिल्ली में आएंगे, जिसमें ज्यादा संख्या गोल्ड मेडल की होगी।'
दिव्या की बात से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सहमति जताई और ध्यान दिलाया कि उस समय उनकी सरकार कई प्रकार के विरोधों का सामना कर रही थी। केजरीवाल ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार जल्द ही खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए दो नीतियां तैयार करेगी। सीएमओ से जारी एक बयान में बताया गया कि पहली नीति का नाम 'प्ले एंड प्रोग्रेस' होगा, जिसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने जीवन में एक बार पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आर्थिक व खेल संबंधी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।
इस नीति को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए विशेषज्ञों की समिति तैयार की जाएगी, जिसमें दिग्गज खिलाड़ी और अन्य अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति हर मामले में दी जाने वाली आर्थिक और खेल संबंधी सुविधाओं से संबंधित फैसला लेगी।
दूसरी नीति को 'मिशन एक्सिलेंस' नाम दिया जाएगा और यह नीति युवावस्था में प्रतिभाओं की खोज पर ध्यान केंद्रित करेगी, ताकि उभरते खिलाड़ियों को उनके खेल में उत्तीर्ण बनाए जाने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। उन्हें हर प्रकार की सुविधाएं दी जाएगी।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले एथलीट्स को दी जाने वाली नकद पुरस्कार इनामी राशि में इजाफा किया है। ऐसे में दिल्ली सरकार एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले एथलीट्स को एक करोड़ रुपए दिए। इसके अलावा, सिल्वर मेडलिस्ट को 75 लाख जबकि ब्रॉन्ज मेडलिस्ट को 50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी गई। इससे पहले गोल्ड मेडल विजेताओं को 20 लाख रुपए, सिल्वर मेडलिस्ट को 14 लाख रुपए और ब्रॉन्ज मेडलिस्ट को 10 लाख रुपए दिए जाते थे।