दरअसल शनिवार की सुबह सेना ने अचानक इस कैंप को आगे अपने यहां लगाए जाने से इंकार कर दिया। उन्होंने इस बारे में आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया और साई को भी सूचित कर दिया। इसके बाद साई ने तत्काल प्रभाव से कैंप बंद करने के आदेश जारी कर दिए और सभी तीरंदाजों को अपने घरों को जाने के लिए कह दिया। बीते पांच दिनों से गुजरात की एक महिला तीरंदाज और उसकी कमरे में साथी हरियाणा की तीरंदाज को एएसआई के बाहर होटल में एकांतवास में रखा गया था। इन दोनों तीरंदाजों को ट्रायल में नहीं खिलाए जाने की बात भी कही गई थी। जिसका इन दोनों ने विरोध किया था।
आज नाटकीय रूप से इन दोनों तीरंदाजों का न सिर्फ एकांतवास खत्म कर दिया गया बल्कि दोनों को अपने घरों को जाने के लिए कह दिया गया। दोनों ने अपने खर्च पर घर वापसी का टिकट कराया। हालांकि यह पैसा उन्हें वापस मिल जाएगा लेकिन किसी ने भी अपने पास से तीरंदाजों का टिकट नहीं कराया।
दरअसल ट्रायल में दीपिका कुमारी, अतानु दास, जयंत तालुकदार, बोंबाइला देवी, तरुणदीप रॉय समेत 16 तीरंदाजों को खेलना था। इनमें से ज्यादातर तीरंदाज कोरोना वायरस के चलते ट्रायल कराए जाने का विरोध कर रहे थे। जिसे साई और एएआई दोनों ने नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन स्थितियां बिगड़ती देख सेना ने ही अचानक कैंप बंद करने का फैसला लिया।