आशीष कुमार, दीपा कर्माकर की वॉल्ट में और सतनाम सिंह, अमज्योत सिंह की बास्केटबॉल में सफलता को देख इन दोनों खेलों की कोचिंग की दुनिया में बेहद सम्मानित नामों ने भारतीय टीमों से जुड़ने की इच्छा जताई है। वॉल्ट में ओलंपिक, वर्ल्ड और यूरोपियन चैंपियन पोलिश लेसजेक ब्लानिक जैसा जिम्नास्ट देने वाले पोलैंड के आंद्रेई लेविट ने वॉल्ट में भारत को ओलंपिक पदक दिलाने का सपना दिखाया है।
वहीं 10 एनबीए खिलाडिय़ों के कोच रह चुके ईरान, सीरिया, लेबनान जैसी टीमों के कोच सर्बियन वेसलीन मेटिच भारतीय बास्केटबॉल टीम से जुडना चाहते हैं। भले ही इन दोनों कोचेज ने भारत से जुड़ने की इच्छा जताई है, लेकिन अब तक इनके अनुबंध पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है।
बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से विज्ञापन निकाले जाने के बाद मेटिच ने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान भारतीय टीम से जुड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनके अनुबंध पर शुक्रवार को फैसला हुआ है।
देरी का भुगतना न पड़े खामियाजा
बास्केटबॉल फेडरेशन को डर है कि मेटिच का अनुबंध पर फैसला हो तो गया है लेकिन वह अब उपलब्ध भी हैं या नहीं इसका उन्हें पता नहीं है। फेडरेशन ने साई को साफ कर दिया है कि उनकी उपलब्धता के बारे में खुद पता लगा लें। अगर वह टीम से जुड़ते हैं तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।
जिस देश में गए मेटिच वहां दिया ओलंपियन
मेटिच की खासियत यह है कि वह जिस देश के भी कोच बनकर गए हैं वहां उन्होंने ओलंपियन दिया है। उनके शिष्य ब्लानिक ने तो सिडनी ओलंपिक में वॉल्ट में कांस्य और बीजिंग ओलंपिक में गोल्ड जीता था। वह इस्राइल, साइप्रस, अजरबैजान के जिम्नास्टों को ओलंपिक क्वालिफाई करा चुके हैं। दीपा, अरुणा, आशीष जैसे जिम्नास्टों के लिए मेटिच वरदान बन सकते हैं। साई उन्हें अनुबंधित करना चाहती है, लेकिन फेडरेशन प्रतिबंधित होने के चलते दिक्कतें आ रही हैं।