मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने दिवंगत दिग्गज धावक मिल्खा सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मकथा ‘द रेस ऑफ माइ लाइफ’ का अंतिम पृष्ठ साझा किया है। इस पेज पर जीवन के प्रति इस महान धावक की गहरी सोच झलकती है।
इस पेज पर लिखा है, ‘मेरे अंतिम शब्द ये होंगे, बतौर खिलाड़ी जिंदगी बेहद मुश्किल होती है। ऐसे भी समय होगा जब आप इसे छोड़ने या शॉर्टकट चुनने के बारे में सोचेंगे लेकिन याद रखिए सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।’ ऐसे समय में इन दो पंक्तियों से बल और प्रेरणा मिलेगी। ‘मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कोई मर्तबा चाहे कि दाना खाक में मिलकर गुल-ए-गुलजार होता है।’ (बीज मिट्टी में मिलने के बाद ही एक दिन फूल का रूप अख्तियार करता है)
एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक जीतने वाले और 1958 राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन मिल्खा सिंह का शुक्रवार को 91 साल की उम्र में निधन हो गया। वह ट्रैक एंड फील्ड में ऐसे एकमात्र भारतीय एथलीट रहे जिन्होंने एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। चार सौ मीटर में उनका रिकॉर्ड 38 साल कायम रहा जबकि राष्ट्रमंडल खेलों में ट्रैक एंड फील्ड में दूसरा भारतीय चैंपियन 52 साल बाद मिला जब कृष्णा पुनिया ने 2010 में चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीता।