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मुक्केबाज अमित पंघाल खेल रत्न के लिए नामांकित, अपनी लगातार अनदेखी से थे निराश

Mon, 01 Jun 2020 06:52 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला

सार

वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट अमित पंघाल के साथ-साथ फेडरेशन ने अनुभवी मुक्केबाज विकास कृष्णन का नाम भी राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए बढ़ाया। बॉक्सिंग फेडरेशन ने इस वार्षिक पुरस्कार के लिए सिर्फ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले मुक्केबाजों को ही नामित किया।
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अमित पंघाल - फोटो : ट्विटर
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विस्तार
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बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) ने भी खेल पुरस्कारों के लिए अपने दावेदारों की घोषणा कर दी है। वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट अमित पंघाल और अनुभवी मुक्केबाज विकास कृष्णन का नाम राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए सोमवार को बढ़ाया गया। BFI ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली तिकड़ी लोवलिना बोरगोहिन (69 किग्रा), सिमरनजीत कौर (64 किग्रा) और मनीष कौशिक (63 किग्रा) को अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया है। राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता कृष्णन (69 किग्रा) 2012 में अर्जुन पुरस्कार हासिल कर चुके है। द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए फेडरेशन ने महिला टीम के राष्ट्रीय कोच मोहम्मद अली कमर और सहायक कोच छोटे लाल यादव को नामित किया। यादव छह बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरीकॉम से भी जुड़े हुए हैं।

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अमित पंघाल ने लिखा था खेलमंत्री को पत्र

अमित पंघाल - फोटो : social media
एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पंघाल (52 किग्रा) ने अब तक कोई भी राष्ट्रीय खेल पुरस्कार नहीं जीता है, उन्हें पिछले तीन वर्षों से अर्जुन पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा रहा है, लेकिन 2012 की 'अनजाने' में डोपिंग करने के मामले में दोषी पाए जाने के कारण चयन समिति द्वारा उनके नाम पर विचार नहीं किया गया, जिसके बाद हाल ही में हरियाणा के इस मुक्केबाज ने खेल मंत्री किरन रिजिजू से राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए चयन प्रक्रिया बदलने का आग्रह करते हुए मौजूदा तरीके को भेदभावपूर्ण बताया था। साल 2012 में अनजाने में हुए डोप अपराध के लिए लगातार अर्जुन पुरस्कार के लिए उनकी अनदेखी होती रही है।

मंत्री को लिखे पत्र में पंघाल ने कहा कि खिलाड़ियों को खुद का नामांकन कर आवेदन नहीं करना चाहिए। विश्व चैंपियनशिप के एकमात्र रजत पदक विजेता भारतीय मुक्केबाज ने कहा, ‘मौजूदा प्रक्रिया में एक खिलाड़ी को आवेदन भेजना होता है। फिर खेल समिति इन आवेदनों के आधार पर चयन करती है। पुरस्कार चयन में खेल समिति के सदस्यों द्वारा भेदभावपूर्ण फैसले होते हैं, जिनकी कोई जवाबदेही नहीं है। खेल मंत्रालय और साई के पास सारे रिकॉर्ड हैं। वे जानते हैं कि कौन हकदार है और कौन नहीं। अगर इस साल नहीं तो, भले ही अगले साल लेकिन कभी तो बदलाव आना चाहिए।
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