पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता अमन सहरावत को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने एक साल के लिए निलंबित कर दिया है। यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया जब अमन विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में निर्धारित वजन सीमा से 1.7 किलोग्राम अधिक वजन के साथ पाए गए थे। 57 किलोग्राम वर्ग के इस प्रमुख फ्रीस्टाइल पहलवान को नियमों के अनुसार प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
डब्ल्यूएफआई ने अपने आधिकारिक पत्र में कहा, 'आपको कारण बताओ नोटिस की तिथि से एक वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती से जुड़ी सभी गतिविधियों से निलंबित किया जाता है।'
जवाब असंतोषजनक पाए जाने के बाद कार्रवाई
कुश्ती महासंघ ने 23 सितंबर 2025 को अमन सहरावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें उनसे इस गलती के लिए स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके जवाब में अमन ने 29 सितंबर को अपना पक्ष रखा, लेकिन अनुशासन समिति ने उनके उत्तर को असंतोषजनक माना।
महासंघ ने कहा, 'अनुशासन समिति ने आपके जवाब की विधिवत समीक्षा की और मुख्य कोच एवं सहायक कोचिंग स्टाफ से भी स्पष्टीकरण प्राप्त किया। विस्तृत जांच के बाद समिति ने आपके जवाब को असंतोषजनक पाया और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया।' इस निर्णय के तहत अमन सहरावत अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर डब्ल्यूएफआई द्वारा आयोजित या स्वीकृत किसी भी कुश्ती गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगे।
डब्ल्यूएफआई ने अनुशासन और पेशेवर आचरण पर दी नसीहत
महासंघ ने इस निलंबन को केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि अनुशासनहीनता और पेशेवर आचरण की कमी से जुड़ा मामला बताया। डब्ल्यूएफआई ने कहा कि एक ओलंपिक पदक विजेता से उम्मीद की जाती है कि वह खेल भावना और अनुशासन के उच्चतम मानकों का पालन करे। उन्होंने कहा, 'एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान होने के नाते, अमन सहरावत से उच्चतम पेशेवर आचरण की अपेक्षा की जाती है। यह चूक कुश्ती के अनुशासन और भारत की छवि के विरुद्ध है।'
वापसी अब अगले साल तक संभव नहीं
अमन सहरावत के निलंबन का अर्थ है कि वे अब 2026 तक किसी भी आधिकारिक प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकेंगे। यह फैसला उनके करियर के लिए एक झटका है, क्योंकि वे भारत के शीर्ष 57 किग्रा फ्रीस्टाइल पहलवानों में से एक माने जाते हैं। डब्ल्यूएफआई का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि संगठन अब खिलाड़ियों के आचरण और फिटनेस मानकों पर सख्ती से अमल करेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कुश्ती की साख बनी रहे।