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एशियाई खेल 2018 के लिए जकार्ता में खर्च हुए 15 अरब 70 करोड़, फिर भी बीमारी का है डर

Fri, 17 Aug 2018 11:33 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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एशियाई खेल
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जकार्ता में चौड़े फुटपाथ, बाइक लेन और पेड़ अचानक उभर आए हैं। प्रमुख स्टेडियम के पास तो यह इसलिए भी दिख रहे हैं क्योंकि इंडोनेशिया की कुख्यात रूप से भीड़ वाली राजधानी एशियाई खेलों की मेजबानी को तैयार है।

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45 विभिन्न एशियाई देशों के 14,000 से अधिक एथलीट्स इस साल स्पर्धा में भाग लेने जा रहे हैं। बता दें कि ओलंपिक के बाद एशियाई खेल दूसरा सबसे बड़ा खेल महोत्सव है। इंडोनेशियाई सरकार ने एशियाई खेलों की मेजबानी के लिए 15 अरब 70 करोड़ रुपयों की मोटी रकम खर्च की है, जिसकी आधिकारिक रूप से शुरुआत 18 अगस्त से हो रही है।

पिछले कुछ महीनों में पुराने मैदानों को अच्छी अवस्था में लाया गया है। नई व्यवस्थाओं का निर्माण किया गया है और शहर के अधिकांश हिस्सों को गेम्स के लिए इंद्रधनुष रंगों में रंगा गया है। मगर शहर को खूबसूरत दिखाने के प्रयास के बावजूद एक बड़ी समस्या अभी भी कायम है।
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पिछले कुछ सालों में वायु प्रदुषण बढ़ा है और जकार्ता विश्व के सबसे प्रदुषित शहरों में से एक है। इसकी प्रमुख वजह पुरानी कार हैं और साथ ही साथ शहर के नजदीक कोएला पावर प्लांट्स का होना भी है। पर्यावरण और वानिकी मंत्रालय कहते हैं कि उसका लक्ष्य प्रदुषण स्तर को 184 माइक्रोग्राम्स से घटाकर 25 माइक्रोग्राम्स प्रति घन मीटर पर लाना है, जो डब्ल्यूएचओ के स्तर का है।

चीन से जकार्ता को सीख लेने की जरूरत

जकार्ता
मगर एशियाई खेलों के शुरू होने से ठीक तीन दिन पहले इंडेक्स ने दर्शाया कि वायु प्रदुषण प्रति घन मीटर 154 माइक्रोग्राम्स के अस्वस्थ स्तर पर है। स्वच्छ वायु एशिया के देश समन्वयक अहमद सफरुदीन ने कहा, 'सरकार ने वायु गुण सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने ट्रैफिक कम करने को महज औपचारिक करार दिया।'

अहमद ने कहा, 'पिछले साल सितंबर में हमारी सरकारी अधिकारों के साथ बैठक हुई, जिसमें उन्हें कहा गया कि अगर एशियाई खेलों के दौरान साफ वायु चाहिए तो उन्हें उत्सर्जन के स्तर पर निगरानी रखना शुरू करना होगा, साफ वायु तकनीक का परिचय, कार इंजिन के लिए 4 यूरो स्टैंर्डड का उपयोग, शहर में ट्रकों की एंट्री पर निषेध और शहर के नजदीक फैक्ट्रीज को बंद करना होगा। मगर अभी आप वायु के स्तर पर नजर डालिए।'

नवंबर 2010 में ग्वांगझु में हुए 16वें एशियाई खेलों के समय चीन भी वायु प्रदुषण की समस्या से जूझ रहा था, लेकिन वह इसे कम करने में सफल रहा था। सफरुदीन ने कहा, 'चीन ने कार और फैक्ट्रीज की संख्या घटाकर प्रदुषण को बेहतर ढंग से कम किया था। अब तक उनके परिणाम बेहतर हैं, जैसे पहले नहीं थे। मगर जकार्ता में पर्यावरण को काई प्राथमिकता ही नहीं, विशेषकर वायु प्रदुषण को। यहां अर्थव्यवस्था पहले आती है।'
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एथलीट्स पर पड़ेगा बुरा असर

एशियाई खेल
पर्यावरण मंत्री की इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। युवा और खेल मंत्री इमाम नाहरावी ने कहा कि सरकार ने सुमात्र में वायु प्रदुषण को रोकने के लिए कड़ी मेहनत की है। मगर उन्होंने साथ ही स्वीकार किया कि राजधानी में ऐसा काम नहीं हुआ है।

स्टडी ने बताया है कि वायु प्रदुषण का बड़ा नकारात्मक असर एक्सरसाइज के दौरान नाक और ओरल ब्रीथिंग पर पड़ता है। एथलीट्स आम व्यक्ति से 20 गुना ज्यादा हवा लेते हैं। एशियाई खेल जैसे महाकुंभ में जीत मिली सेकंड्स या मिलिमीटर्स में तय होती है। ऐसे में एथलीट्स को दिक्कत हो सकती है।
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