मगर एशियाई खेलों के शुरू होने से ठीक तीन दिन पहले इंडेक्स ने दर्शाया कि वायु प्रदुषण प्रति घन मीटर 154 माइक्रोग्राम्स के अस्वस्थ स्तर पर है। स्वच्छ वायु एशिया के देश समन्वयक अहमद सफरुदीन ने कहा, 'सरकार ने वायु गुण सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने ट्रैफिक कम करने को महज औपचारिक करार दिया।'
अहमद ने कहा, 'पिछले साल सितंबर में हमारी सरकारी अधिकारों के साथ बैठक हुई, जिसमें उन्हें कहा गया कि अगर एशियाई खेलों के दौरान साफ वायु चाहिए तो उन्हें उत्सर्जन के स्तर पर निगरानी रखना शुरू करना होगा, साफ वायु तकनीक का परिचय, कार इंजिन के लिए 4 यूरो स्टैंर्डड का उपयोग, शहर में ट्रकों की एंट्री पर निषेध और शहर के नजदीक फैक्ट्रीज को बंद करना होगा। मगर अभी आप वायु के स्तर पर नजर डालिए।'
नवंबर 2010 में ग्वांगझु में हुए 16वें एशियाई खेलों के समय चीन भी वायु प्रदुषण की समस्या से जूझ रहा था, लेकिन वह इसे कम करने में सफल रहा था। सफरुदीन ने कहा, 'चीन ने कार और फैक्ट्रीज की संख्या घटाकर प्रदुषण को बेहतर ढंग से कम किया था। अब तक उनके परिणाम बेहतर हैं, जैसे पहले नहीं थे। मगर जकार्ता में पर्यावरण को काई प्राथमिकता ही नहीं, विशेषकर वायु प्रदुषण को। यहां अर्थव्यवस्था पहले आती है।'
पर्यावरण मंत्री की इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। युवा और खेल मंत्री इमाम नाहरावी ने कहा कि सरकार ने सुमात्र में वायु प्रदुषण को रोकने के लिए कड़ी मेहनत की है। मगर उन्होंने साथ ही स्वीकार किया कि राजधानी में ऐसा काम नहीं हुआ है।
स्टडी ने बताया है कि वायु प्रदुषण का बड़ा नकारात्मक असर एक्सरसाइज के दौरान नाक और ओरल ब्रीथिंग पर पड़ता है। एथलीट्स आम व्यक्ति से 20 गुना ज्यादा हवा लेते हैं। एशियाई खेल जैसे महाकुंभ में जीत मिली सेकंड्स या मिलिमीटर्स में तय होती है। ऐसे में एथलीट्स को दिक्कत हो सकती है।