वाडा की ओर से संकेत दिए जाने के बावजूद खेल मंत्रालय और एनडीटीएल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सितंबर 2018 के दौरे के दौरान वाडा ने साफ तौर पर एनडीटीएल में वैज्ञानिकों और उपयुक्त स्टाफ की कमी का मामला उठाया था। उसके बाद खेल मंत्रालय हरकत में आया और 15 वैज्ञानिकों समेत 26 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
लैब में वैज्ञानिकों के रखे जाने के लिए वित्त मंत्रालय की ओर से भी मंजूरी प्रदान कर दी गई। यही नहीं भर्ती केलिए विज्ञापन निकाले जाने की तैयारी कर ली गई, लेकिन इस साल जनवरी माह के बाद अचानक इस फैसले को रोक दिया गया। इसके बाद मई माह में दौरे के बाद वाडा ने लैब की मान्यता खत्म करने का फैसला ले लिया।
उस दौरान लैब में की गई वैज्ञानिकों की भर्ती लैब को निलंबन से बचा सकती थी। लैब में अत्याधुनिक आईआरएमएस मशीनें भी मंगवाई गई थीं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए विशेषज्ञ नहीं थे। हालांकि पिछले कुछ दिनों में इन मशीनों को शुरू कर दिया गया था।
15 दिन पहले सरकार ने वाडा को दिया था भरोसा
खेल मंत्रालय ने 15 दिन पहले ही वाडा अध्यक्ष को भरोसा दिलाया था कि सितंबर 2018 दौरे के दौरान पाई गई खामियों को दूर कर लिया गया है। पत्र में खेल सचिव आरएस जुलानिया की ओर से कहा गया था कि साइंटिफिक डायरेक्टर पीएल साहू के अलावा सवा सात लाख अमेरिकी डॉलर की लागत से आर्बिट्रेप, सिसमेक्स, कोबास जैसे हाई क्रोमेटोग्राफर और आईआरएमस मशीनों को लाने की बात कही गई।
यही नहीं खेल सचिव ने वाडा को यहा भी बताया कि रोम एंटी डोपिंग लैब के साइंटिफिक उप निदेशक डॉ. जेवियर डी ला टोरे ने एनडीटीएल लैब का दौरा किया। उन्होंने लैब के बारे में काफी सकारात्मक रिपोर्ट दी है। वाडा अध्यक्ष को यह भी कहा गया कि जब अगली बार वाडा की टीम लैब का दौरा करेगी तो उन्हें क्वालिटी मैनेजमेंट के बारे में कोई कमी नहीं मिलेगी। बावजूद इसके वाडा ने अगला दौरा किए बाने लैब की मान्यता खत्म कर दी।