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कॉमनवेल्थ गेम्स में निशानेबाजी का शामिल होना मुश्किल, आईओ बहिष्कार के फैसले पर कायम

Thu, 14 Nov 2019 09:21 PM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय ओलंपिक संघ
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कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (सीजीएफ) और भारतीय  ओलंपिक संघ (आईओए) ने बृहस्पतिवार को भले ही दावा किया कि उनके बीच बातचीत सकारात्मक रही है, लेकिन सच्चाई यही है कि 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में शूटिंग को शामिल किए जाने को लेकर बात बनती नहीं दिखाई दे रही है। आईओए ने यहां तक कह दिया कि कॉमनवेल्थ खेलों से हटने की बात पर वह कायम हैं। जिसे उनकी ओर से अपनी कार्यकारिणी में रखा जाएगा। 

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वहीं सीजीएफ ने साफ किया कि उनकी कोशिश रहेगी कि इंटरनेशनल शूटिंग स्पोट्र्स फेडरेशन (आईएसएसएफ) और आयोजनकर्ताओं से बात कर 2022 के खेलों के दौरान कॉमनवेल्थ शूटिंग चैंपियनशिप कराई जाए। साथ ही इस चैंपियनशिप के पदकों को कॉमनवेल्थ खेलों की पदक तालिका में शामिल किया जाए।

आईओए अध्यक्ष नरेंदर बत्रा ने साफ किया कि वह कॉमनवेल्थ खेलों से हटने के अपने बयान पर कायम हैं। सीजीएफ के साथ हुई बातचीत को आईओए की कार्यकारिणी में रखा जाएगा। यहां जो भी फैसला लिया जाएगा उसे सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
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वहीं आईओए सेक्रेटरी जनरल ने घोषणा की कि भारत 2026 के कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी के लिए आगे बढ़ सकता है। वहीं सूत्र बताते हैं कि आईओए ने कड़ाई से सीजीएफ को साफ कर दिया है कि खेलों में शूटिंग को शामिल करो वरना उनके पास इनसे हटने का विकल्प खुला है।

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खेल मंत्री किरन रिजीजू से की बात

सीजीएफ अध्यक्ष लुइस डेम मार्टिन और सीईओ डेविड ग्रेवेमबर्ग ने इन सभी मुद्दों पर आईओए और खेल मंत्री किरन रिजीजू से बात की। मीडिया के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से आए विरोधाभाषी बयानों से साफ लगा कि बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में शूटिंग के शामिल होने की संभावना समाप्त हो चुकी है। सीजीएफ अध्यक्ष ने बाद में कहा भी कि शूटिंग का 2022 में शामिल होना संभव नहीं है, लेकिन 2026, 2030 में इसे शामिल किया जाएगा। 

साथ ही वह कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के पदकों को कॉमनवेल्थ खेलों में की पदक तालिका में शामिल करानी की जरूर कोशिश करेंगी। वहीं ग्रेवेमबर्ग ने कहा कि शूटिंग सीजीएफ में वैकल्पिक खेल है। 2015 में भी इसे कोर खेलों में शामिल करनी की कोशिश नहीं की गई। अब इस बारे में आईएसएसएफ से बात कर इसे सिरे चढ़ाया जाएगा।

खेलों से हटने और मेजबानी की बात साथ-साथ
नरेंदर बत्रा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले कॉमनवेल्थ खेलों के बहिष्कार की बात कही थी, लेकिन बहिष्कार की बजाय इन खेलों से हटना शब्द ठीक रहेगा। एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स के बीच महज एक माह का अंतर होने के चलते वह अभी भी इन खेलों से हटने की बात पर कायम हैं और इसे आईओए कार्यकारिणी में रखा जाएगा। वहीं राजीव मेहता ने स्वीकार किया सीजीएफ से इन खेलों की एक बार फिर मेजबानी हासिल करने पर बात हुई है। आपसी और सरकार से बातचीत के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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