सीजीएफ अध्यक्ष लुइस डेम मार्टिन और सीईओ डेविड ग्रेवेमबर्ग ने इन सभी मुद्दों पर आईओए और खेल मंत्री किरन रिजीजू से बात की। मीडिया के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से आए विरोधाभाषी बयानों से साफ लगा कि बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में शूटिंग के शामिल होने की संभावना समाप्त हो चुकी है। सीजीएफ अध्यक्ष ने बाद में कहा भी कि शूटिंग का 2022 में शामिल होना संभव नहीं है, लेकिन 2026, 2030 में इसे शामिल किया जाएगा।
साथ ही वह कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के पदकों को कॉमनवेल्थ खेलों में की पदक तालिका में शामिल करानी की जरूर कोशिश करेंगी। वहीं ग्रेवेमबर्ग ने कहा कि शूटिंग सीजीएफ में वैकल्पिक खेल है। 2015 में भी इसे कोर खेलों में शामिल करनी की कोशिश नहीं की गई। अब इस बारे में आईएसएसएफ से बात कर इसे सिरे चढ़ाया जाएगा।
खेलों से हटने और मेजबानी की बात साथ-साथ
नरेंदर बत्रा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले कॉमनवेल्थ खेलों के बहिष्कार की बात कही थी, लेकिन बहिष्कार की बजाय इन खेलों से हटना शब्द ठीक रहेगा। एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स के बीच महज एक माह का अंतर होने के चलते वह अभी भी इन खेलों से हटने की बात पर कायम हैं और इसे आईओए कार्यकारिणी में रखा जाएगा। वहीं राजीव मेहता ने स्वीकार किया सीजीएफ से इन खेलों की एक बार फिर मेजबानी हासिल करने पर बात हुई है। आपसी और सरकार से बातचीत के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।