फोर्स इंडिया में भले ही कोई भारतीय ड्राइवर नहीं हो। लेकिन बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर जुटने वाले तकरीबन एक लाख दर्शकों के समर्थन पर इस भारतीय टीम के दोनों विदेशी ड्राइवरों की निगाहें लगी हैं। निको हल्केनबर्ग और पाल डि रेस्टा की चाहत है कि बीआईसी पर उन्हें भारतीय दर्शकों का वैसा ही समर्थन मिले जैसा इटली में फेरारी को मिलता है। दोनों ही ड्राइवरों के लिए यह रेस अहमियत रखती है। दोनों का ही कहना है कि वह अपना यहां सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हुए इसे ऐतिहासिक बनाएंगे।
अब तक की हुई रेसों में दोनों ही ड्राइवर दो बार पोडियम फिनिश से चूकते हुए चौथे स्थान पर रहे हैं। हल्केनबर्ग और डि रेस्टा ने अमर उजाला से खुलासा किया कि उनके लिए यह मौका खास होगा। उन्हें मालूम है कि पिछली बार उन्हें यहां काफी समर्थन मिला था। यही कारण है कि उन्हें उम्मीद है कि वह अपने पोडियम फिनिश के सूखे को यहां खत्म कर सकते हैं।
दरअसल दोनों ही ड्राइवर पिछली बार यहां जुड़े अपार संख्या में दर्शकों के समर्थन को अपनी ताकत बनाना चाहते हैं। निको का कहना है कि उन्होंने बीते वर्ष इसे महसूस किया। उम्मीद है कि यह इस बार और बढ़ेगा। वहीं डि रेस्टा कहते हैं कि वह फोर्स इंडिया से जुड़कर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। एक देश में एक टीम होने के नाते वह बीआईसी पर फोर्स इंडिया को अपार समर्थन की उम्मीद कर सकते हैं। ठीक वैसा ही समर्थन जैसा फेरारी को इटली में मिलता है।
इस बार जितने अंक फोर्स इंडिया ने जुटाए हैं। उससे कम अंकों पर उन्हें छठा स्थान मिला था। लेकिन इस बार टीम सातवें स्थान पर है। दोनों ही ड्राइवर कहते हैं कि बाकी की बची चार रेसों में उनका प्रमुख लक्ष्य उनसे आगे मौजूद टीम सोबर को पीछे छोड़ छठा स्थान हासिल करना है। उन्हें उम्मीद है कि यह चुनौती हासिल कर लेंगे। लेकिन वह दोनों ही अब तक के अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हैं।