भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा भले ही पिछले करीब एक साल से पीठ के निचले हिस्से की चोट से जूझ रहे हों और हाल में उनके फिटनेस तथा फॉर्म को लेकर सवाल उठे हों, लेकिन एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) की चयन समिति के अध्यक्ष एडिले सुमरिवाला का मानना है कि देश के इस महान एथलीट को कभी-कभार रजत पदक जीतने के लिए कठघरे में खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले नीरज को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए सराहा जाना चाहिए।
नीरज चोपड़ा
- फोटो : IANS
एक दशक से लगातार बड़ी उपलब्धियां
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज ने पिछले महीने ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 86.48 मीटर के सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता। उन्होंने 2018 में इसी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि चोट के कारण 2022 के संस्करण में हिस्सा नहीं ले सके थे।
सुमरिवाला ने नीरज के हालिया प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि गोल्डन बॉय से हर बार स्वर्ण पदक की उम्मीद करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, नीरज ने 2016 में जूनियर विश्व रिकॉर्ड कायम करने के बाद से वैश्विक स्तर पर जिस निरंतरता के साथ प्रदर्शन किया है, वह अपने आप में असाधारण है। सुमरिवाला ने उन्हें देश का सबसे महान एथलीट बताते हुए कहा कि कभी-कभी रजत पदक आना स्वाभाविक है, क्योंकि आखिरकार नीरज भी इंसान हैं।
नीरज चोपड़ा
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अब खेलों की नई पीढ़ी से जुड़ेंगे नीरज
इसी बीच नीरज ने जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक नई भूमिका संभाली है। वह शुक्रवार को यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप के सह-मालिक बन गए। वह पिछले दो सत्रों से इस पहल के एंबेसडर के रूप में इससे जुड़े हुए थे।
यह कार्यक्रम बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए मनोरंजक, समावेशी और सुलभ प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है। अब तक इसके जरिए पांच शहरों के 2,500 से अधिक स्कूलों में 2.5 लाख से ज्यादा बच्चों को खेलों से जोड़ा जा चुका है। कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिशत प्रतिभागी लड़कियां हैं।
नीरज चोपड़ा
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नीरज ने कहा कि पिछले दो सत्रों में उन्होंने इस पहल का बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव करीब से देखा है। उनके अनुसार, हर बच्चे को अपनी प्रतिभा खोजने और उसे दिखाने का अवसर मिलना चाहिए और सह-मालिक बनना इस पहल के साथ उनके जुड़ाव का स्वाभाविक अगला कदम है। इस पहल का लक्ष्य अब पूरे भारत में 10 लाख बच्चों तक पहुंचना है। नीरज ने कहा कि वह बच्चों, शिक्षकों और स्कूलों के साथ अपने अनुभव साझा करने के लिए उत्साहित हैं, क्योंकि जितने ज्यादा बच्चे खेलेंगे, उतनी ही अधिक संभावना भविष्य के चैंपियन तैयार होने की होगी।