वीडियो संदेश के जरिए की बड़ी घोषणा
शुक्रवार को आयोजित आईओए खिलाड़ी फोरम में नीरज चोपड़ा ने एक विशेष वीडियो संदेश के जरिए नीरज चोपड़ा फाउंडेशन और आईओए के बीच इस संयुक्त अभियान की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए अपने करियर के संघर्षों को भी सामने रखा।
'ओलंपिक मेडल तक पहुंचने में मुझे 10 साल लगे'
वीडियो संदेश में नीरज चोपड़ा ने युवाओं में धैर्य की कमी पर चिंता जताते हुए कहा "मैंने देखा है कि बच्चे बड़े पदक जीतने की होड़ में डोपिंग के जरिए अपना प्रदर्शन बेहतर करना चाहते हैं। लेकिन मैं अपनी खुद की कहानी से आपको बता सकता हूं कि मुझे ओलंपिक पदक तक पहुंचने में पूरे 10 साल की कड़ी मेहनत लगी।"
उन्होंने आगे कहा कि खेलों में कुछ भी बड़ा हासिल करने के लिए सब्र की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। मैं देख रहा हूं कि आज के बच्चों में इसी सब्र की कमी है। वे हर चीज बहुत जल्दी हासिल करना चाहते हैं। बच्चे चाहते हैं कि वे एक साल में ही 80 मीटर का लक्ष्य पार कर लें, जबकि वास्तव में ऐसा करने में पांच साल का समय लगता है।
साझा किया जूनियर दिनों का संकल्प
इस स्टार एथलीट ने खिलाड़ियों को बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट्स को लेकर भी सतर्क किया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी बच्चे अनजाने में ऐसे सप्लीमेंट का सेवन कर लेते हैं जिनमें मिलावट हो सकती है। अपने जूनियर दिनों की यादों को साझा करते हुए नीरज ने कहा, "जब मैं जूनियर था, तो जब भी किसी खिलाड़ी पर डोपिंग प्रतिबंध के बारे में सुनता था, तो उसका बर्बाद हुआ समय देखकर मुझे बहुत हैरानी और दुख होता था। मैंने तभी खुद से यह पक्का वादा कर लिया था कि मैं अपने करियर में कभी भी इस गलत रास्ते को नहीं अपनाऊंगा।"
चिंताजनक हैं आंकड़े
नीरज चोपड़ा की यह पहल इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत पिछले तीन वर्षों से विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी की सबसे अधिक डोप उल्लंघन करने वाली देशों की सालाना सूची में लगातार शीर्ष (पहले) स्थान पर बना हुआ है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए अब नीरज और आईओए मिलकर जागरूकता की इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे।