आज राष्ट्रीय खेल दिवस है, यानी आज के ही दिन 29 अगस्त 1905 को हॉकी के महान जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ था। अपने कदमों की रफ्तार और हॉकी की तेजी से उन्होंने दुनिया भर के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा।
उनके खेल की दीवानगी भारत में ही नहीं, बल्कि विश्वभर में छाई रही। क्रिकेट में सर डॉन ब्रैडमैन और फुटबॉल में पेले को जो मुकाम हासिल है, हॉकी में ध्यानचंद का वही स्थान है। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से 400 ज्यादा गोल करने वाले ध्यानचंद अपने उसूलों और नियमों के भी काफी पक्के थे।
बताया जाता है कि एक मैच में लगातार कईं प्रयासों के बाद भी ध्यानचंद गोल करने में नाकाम रहे। ऐसा उनके साथ पहले कभी नहीं हुआ था। वो बार-बार कोशिश करते पर गेंद गोल पोस्ट के अंदर नहीं डाल पाते।
ध्यानचंद के खेल पर न तो दर्शकों और न ही किसी खिलाड़ी को शक था। आखिरकार उन्होंने गोल पोस्ट की लम्बाई को लेकर रेफरी से शिकायत की। उनकी इस शिकायत पर सब हैरान थे। हॉकी के खेल इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।
ध्यानचंद की शिकायत पर जब गोल पोस्ट को नापा गया, तो नियमों के मुताबिक गोल पोस्ट छोटा था। हालांकि यह मैच कौन सा था, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। कहते है कि जब ध्यानचंद मैदान में उतरते थे तो गेंद उनकी स्टिक से चिपकी रहती थी।
इसी तरह हॉलैंड में विरोधी टीम ने मेजर की हॉकी पर आपत्ति जताई, जिस पर मैच रेफरी ने उनकी हॉकी स्टिक तोड़कर देखी,कि कहीं उसके अन्दर चुम्बक तो नहीं है।