देश की पहली विश्व चैंपियन महिला पहलवान मनीषा भानवाला के लिए एशियाई खेलों से खाली हाथ लौटना आसान नहीं था। जापान से घर लौटते ही मनीषा लोगों के निशाने पर थीं। मनीषा अमर उजाला को बताती हैं कि लोगों ने उन पर संदेह करना शुरू कर दिया था। उनसे सवाल किए जा रहे थे आखिर उनसे बड़े मंच पर अच्छा प्रदर्शन क्यों नहीं हो रहा है। मनीषा बताती हैं कि वह निराश थीं, लेकिन उन्होंने प्रण लिया था कि वह एशियाई खेलों की विफलता का विश्व चैंपियनशिप में स्वर्णिम प्रदर्शन कर जवाब देंगी, लेकिन यह आसान नहीं था।
मनीषा इससे पहले तीन विश्व चैंपियनशिप खेल चुकी थीं और तीनों ही चैंपियनशिप में वह खाली हाथ लौटी थीं। मनीषा ने अपने पिता सुरेश को याद किया और अपनी डायरी को देखा जिसमें उन्होंने खुद को विश्व चैंपियन लिखकर रखा था। फिर जो हुआ वह इतिहास है। मनीषा विश्व चैंपियन जरूर बन गई हैं, लेकिन उनका अगला लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक का पदक है।