आखिर जिसकी उम्मीद थी वही होने जा रहा है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने बुधवार की शाम साफ कर दिया कि वह इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन को प्रतिबंधित करने जा रहे हैं।
आईओसी ने आईओए से कहा है कि उनके मना करने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया नहीं रोकी गई है। जिसके चलते उनकी ओर से पांच दिसंबर को होने वाले इस चुनाव में न उनका और न ही ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया का प्रतिनिधि भेजा जाएगा। साथ ही चार और पांच दिसंबर को होने वाली आईओसी की कार्यकारिणी में आईओए को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव उनकी ओर से रखा जाएगा।
आईओसी के डायरेक्टर जनरल क्रिस्टोफ डि केप्पर की ओर से आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष विजय मल्होत्रा को भेजे पत्र में कहा गया है कि 23 नवंबर के पत्र के जवाब में उन्हें आईओए का 26 नवंबर का पत्र मिल गया है। लेकिन इस जवाब से कहीं यह साफ नहीं होता है कि चुनाव प्रक्रिया ओलंपिक चार्टर या फिर आईओए संविधान के अनुसार कराई जा रही है। उनके एतराज के बावजूद चुनावी प्रक्रिया स्पोर्ट्स कोड के अनुसार जारी है।
आईओसी को हैरानी है कि उनके कहने के बावजूद न ही आईओए और न ही भारत सरकार ने इस दिशा में कोई सार्थक कदम उठाया है। ऐसे में उनके पास चार दिसंबर से शुरू हो रही अपनी कार्यकारिणी में आईओए को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव रखने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है। पत्र में यह भी कहा गया है कि हालांकि आईओए के पास अभी भी 30 नवंबर तक इस दिशा में सुधार करने का समय है। लेकिन इसके बाद उन्हें कोई मोहलत नहीं दी जाएगी।
आईओसी के इस पत्र के बाद अभय सिंह चौटाला कैंप में हड़कंप का माहोल बन गया है। ग्रुप के उम्मीदवारों ने इस मुद्दे पर आपातकालीन बैठक बुलाई है। वहीं रंधीर सिंह ने इस सारे विवाद के लिए विजय मल्होत्रा को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि मल्होत्रा कदम उठाते हुए तो यह नौबत नहीं आती। इससे पहले चौटाला ग्रुप से खड़े ललित भनोट का निर्विरोध सेक्रेटरी जनरल चुना जाना तय हो गया है। उनके खिलाफ ताल ठोक रहे वॉलीबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी के मुरुगन ने बुधवार को अपना नाम वापस ले लिया।