इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के साथ बातचीत के रास्ते बंद कर दिए हैं। आईओसी ने आईओए के बातचीत के प्रस्ताव को अब तक स्वीकार नहीं किया है। आईओसी ने आईओए को अपना पक्ष रखने के लिए दो सदस्यीय पैनल को भेजने की अनुमति देने के पत्र का जवाब नहीं दिया है। जबकि मंगलवार से आईओसी की दो दिवसीय कार्यकारिणी होने जा रही है, इसमें आईओए के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखे जाने की संभावनाएं पूरी तरह प्रबल हैं।
चौटाला ग्रुप के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। अपना चुना जाना तय होने के बाद उन्होंने न सिर्फ रंधीर के इस्तीफे की मांग उठा डाली थी बल्कि यह भी घोषणा की थी कि आरके आनंद और नरिंदर बत्रा का दो सदस्यीय पैनल आईओए का पक्ष रखने के लिए लुसान जाएगा। आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष विजय मल्होत्रा ने आईओसी को पत्र लिखकर दो सदस्यीय पैनल भेजने की अनुमति भी मांगी थी।
मल्होत्रा ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने पत्र भेजा था, लेकिन आईओसी ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। इसका मतलब यही हुआ वह इस मामले पर बातचीत नहीं करना चाहते हैं। अब देखना होगा कि चार दिसंबर से शुरू हो रही बैठक में वह आईओए के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं। सूत्रों की मानें तो आईओसी के इस कदम से चौटाला खेमे में भी चिंता का माहौल है। उन्हें भी लगने लगा है कि आईओसी अब प्रतिबंध लगा सकता है।
यही नहीं बातचीत के लिए नरिंदर बत्रा और आरके आनंद के फ्लाइट के टिकट भी बुक करा लिए गए हैं। वहीं, आईओए के पांच दिसंबर को होने वाले चुनाव में रंधीर सिंह ग्रुप के खेल संघों में मतदान को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। हालांकि उनके भतीजे रणइंदर सिंह की अगुवाई वाली एनआरएआई ने मतदान से किनारा करने की घोषणा कर दी है। लेकिन कुछ संघ मतदान के लिए अपने प्रतिनिधियों को भेज सकते हैं।