अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) द्वारा भारत के निलंबन के एक दिन बाद केंद्रीय खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसके लिए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को जिम्मेदार ठहराया है। श्री सिंह ने कहा कि अगर आईओए ने अपने संविधान में खेल संहिता के मुताबिक संशोधन किया होता तो देश को यह दिन नहीं देखना पड़ता।
खेल मंत्री ने कहा, ‘दो दिन पहले मैं आईओए के अधिकारियों से मिला था और मैंने उन्हें चेताया था कि अगर वे अपने संविधान में संशोधन नहीं करते हैं तो भारत पर प्रतिबंध लग सकता है। लेकिन आज हमें एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने के बजाए भविष्य की रणनीति पर मिलकर काम करने की जरूरत है।
यह मामला सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है लेकिन हम इसे लेकर चिंतित हैं। यही वजह है कि हमने आईओए की बैठक बुलाई थी और आईओसी को भी पत्र लिखा था। हम इस मामले को सुलझाने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे। मैं एक बार फिर आईओसी से बात करूंगा और उनसे आग्रह करूंगा कि यह भारतीय खिलाड़ियों के भविष्य का सवाल है इसलिए हमें इस मामले में बात करनी चाहिए।
हम इस मामले को सुलझाने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे। हम इस मामले में मध्यस्थता के लिए भी तैयार हैं। अगले कुछ दिनों में मैं पूरे मामले पर खिलाड़ियों से भी बात करूंगा।’ गौरतलब है कि आईओसी ने आईओए के चुनावों में सरकारी हस्तक्षेप को ओलंपिक चार्टर का उल्लंघन बताते हुए आईओए को ओलंपिक आंदोलन से निलंबित कर दिया था।