नियमित कप्तान सरदार सिंह की अनुपस्थिति में जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम पर्थ में मेजबान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैचों की सीरीज के तीसरे मैच में खेलने उतरी तो उसके लिए चुनौती काफी बड़ी थी।
ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम की अगुआई करने की जिम्मेदारी 23 वर्षीय रुपिंदर पाल सिंह के कंधों पर आई। दोनों टीमें मैदान पर सीरीज में 1-1 की बराबरी के साथ उतरी थी और इस स्थिति में यह मैच दोनों टीमों के लिए काफी अहम हो गया था।
अपना 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने उतर रहे रुपिंदर ने शानदार तरीके से टीम की अगुआई की और दबाव से पार पाते हुए भारतीय टीम ने विश्व चैंपियन को उसी के घर में 1-0 से शिकस्त दी। इस जीत से भारत ने सीरीज में न सिर्फ 2-1 की अजेय बढ़त कायम की बल्कि रुपिंदर को उनके 100वें अंतरराष्ट्रीय मैच में जीत का बेहतरीन तोहफा भी मिला।
भारतीय टीम के लिए निर्णायक गोल मैच के तीसरे क्वार्टर में एसवी सुनील ने ठोका। सीरीज का चौथा और फाइनल मैच रविवार को खेला जाएगा। अब भारतीय टीम की नजर फाइनल को जीतकर सीरीज कब्जाने पर है।
इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और उसके डिफेंस को कई बार छकाया। इसके बावजूद भारतीय टीम को पहले क्वार्टर में गोल करने में सफलता हासिल नहीं हुई। दूसरे हॉफ में भी वही कहानी दोहराई गई।
तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने आखिरकार ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस में सेंध लगाने में सफलता हासिल कर ही ली। मैच के 34वें मिनट में एसवी सुनील को आकाशदीप सिंह ने खूबसूरत पास दिया जिसे उन्होंने नेट में उलझाने में कोई गलती नहीं की।
इस गोल के बाद भारतीय और ज्यादा आक्रामक हो गए और ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ लगातार अपने हमले जारी रखे। दूसरी ओर मेजबान टीम को भारतीय डिफेंस में सेंध लगाने का कोई अवसर ही नहीं मिल रहा था। आखिरी क्वार्टर में तो जब कभी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने भारतीय टीम के डी में घुसने की कोशिश की तो भारतीय डिफेंडरों ने बेहतरीन टैकलिंग का मुजायरा पेश करते हुए उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।