नितेश सिवाच को जापान के यूरी नाकाजातो से हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा जिससे भारत का एशियन गेम्स में ग्रीको रोमन शैली के चैंपियन को देखने का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार भी बढ़ गया। नितेश ने 97 किलोग्राम भार वर्ग के इस मुकाबले में शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाने की कोशिश की, लेकिन जापान के पहलवान ने उनकी एक नहीं चलने दी। नितेश आखिर में 0-4 से हार गए।
ग्रीको रोमन में स्वर्ण का इंतजार जारी
भारत की तरफ से ग्रीको रोमन शैली में एशियाई खेलों में आखिरी बार स्वर्ण पदक 1962 में मालवा सिंह (52 किलोग्राम) और गणपत अंडालकर (97 किलोग्राम से अधिक) ने जीते थे। जापान के पहलवान ने नितेश को आगे धकेलकर स्कोरिंग की शुरुआत की। नितेश को निष्क्रियता के कारण ग्राउंड पोजीशन में आना पड़ा, लेकिन उन्होंने शानदार बचाव किया और नाकाजातो को अंक हासिल करने का मौका नहीं दिया।
नाकाजातो ने पहले पीरियड के अंत तक 2-0 की बढ़त बना ली थी और अंत तक नितेश को ‘हेड लॉक’ पोजीशन में जकड़े रखा। स्थानीय खिलाड़ी ने इसके बाद नितेश का संतुलन बिगाड़ दिया और इस दांव को सफलतापूर्वक ‘टेक डाउन’ में बदलकर 4-0 की बढ़त हासिल कर ली। जब एक मिनट का समय बचा था तब भारतीय पहलवान को आक्रामक होने की जरूरत थी लेकिन जापान के पहलवान ने ऐसा नहीं होने दिया।
मानसी
- फोटो : X
कांस्य से चूकीं मानसी
भारतीय महिला पहलवान मानसी को 62 किग्रा भार वर्ग के कांस्य पदक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। मानसी को मंगोलिया की अल्तजिन तोगतोख ने 5-2 से हराया और कांस्य पदक अपने नाम किया। अल्तजिन ने शुरुआत में 2-0 की बढ़त बनाई थी, लेकिन मानसी ने वापसी करते हुए स्कोर 2-2 कर दिया था। इसके बाद मंगोलियाई पहलवान ने जोरदार वापसी की और मैच अपने नाम कर लिया।