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एशियन पैरा गेम्स: हरविंदर-विजय ने तीरंदाजी में जीता स्वर्ण, भावना-पूजा को रजत से करना पड़े संतोष

Fri, 23 Oct 2026 09:08 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया

सार

एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत ने पैरा तीरंदाजी में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने पुरुष रिकर्व युगल फाइनल में चीन को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। वहीं, भावना चौधरी और पूजा जात्यान को महिला रिकर्व युगल फाइनल में चीन के खिलाफ 0-6 से हार के बाद रजत पदक मिला।
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हरविंदर सिंह - फोटो : @TheKhelIndia
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विस्तार
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एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है। हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन को 5-1 से हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। वहीं, महिला रिकर्व युगल स्पर्धा में भारत की भावना चौधरी और पूजा जात्यान को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उन्हें फाइनल में चीन की जोड़ी के खिलाफ 0-6 से हार मिली।
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हरविंदर-विजय की जोड़ी ने चीन को दी मात
हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने पुरुष पैरा रिकर्व युगल स्पर्धा के फाइनल में चीन के डुओ युन और झाओ लिक्सुए को 5-1 से हराया। नागोया के ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पज स्क्वायर में खेले गए मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। मुकाबले का पहला सेट 35-35 से बराबर रहा। इसके बाद भारतीय तीरंदाजों ने दूसरे सेट में 37-36 और तीसरे सेट में 38-36 से जीत दर्ज की। लगातार दो सेट जीतकर हरविंदर और विजय ने खिताब अपने नाम कर लिया।

भावना-पूजा को रजत पदक से करना पड़ा संतोष
महिला पैरा रिकर्व युगल स्पर्धा के फाइनल में भारत की भावना चौधरी और पूजा जात्यान को चीन की गाओ जिहान और वांग शुएचियान के खिलाफ 0-6 से हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी तीनों सेट में चीन की तीरंदाजों से पीछे रही। भारत ने पहले सेट में 31, दूसरे में 30 और तीसरे में 29 अंक हासिल किए। वहीं, चीनी जोड़ी ने क्रमशः 38, 35 और 39 अंक जुटाकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस हार के साथ भावना और पूजा को रजत पदक मिला और भारत ने तीरंदाजी में एक स्वर्ण तथा एक रजत पदक अपने नाम किया।
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कौन हैं हरविंदर?
हरविंदर सिंह का जन्म 25 फरवरी 1991 को हरियाणा के कैथल में हुआ था। अजीत नगर के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरविंदर जब डेड़ साल के थे तो उन्हें डेंगू हो गया था और इसके उपचार के लिए उन्हें इंजेक्शन लगाए गए थे। दुर्भाग्य से इन इंजेक्शन के कुप्रभावों से उनके पैरों की गतिशीलता चली गई।

चुनौतियों से नहीं मानी हार
शुरुआती चुनौतियों के बावजूद वह तीरंदाजी में आ गए और 2017 पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप में डेब्यू में सातवें स्थान पर रहे। फिर 2018 जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे और कोविड 19 महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में उनके पिता ने अपने खेत को तीरंदाजी रेंज में बदल दिया ताकि वह ट्रेनिंग कर सकें।
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अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री
तीरंदाजी में सफलता के साथ हरविंदर अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री भी ले रहे हें। जून 2024 में पैरा तीरंदाजी विश्व रैंकिंग स्पर्धा में उन्होंने चेक गणराज्य में कांस्य पदक जीता था। इससे पहले अप्रैल 2024 में विश्व तीरंदाजी ओशिनिया 2024 पैरा ग्रैंड प्रिक्स में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में कांस्य पदक जीता था।

हरविंदर ने पेरिस में स्वर्ण और टोक्यो में जीता था कांस्य
हरविंदर सिंह ने पेरिस पैरालंपिक में पुरुष रिकर्व के फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। टोक्यो पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। यह तीरंदाजी में भारत का पैरालंपिक का पहला पदक था। उन्होंने कोरियाई तीरंदाज को शूट ऑफ में 6-5 से पीछा छोड़ा और पदक अपने नाम किया था।
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