32 साल बाद भारत और पाकिस्तान की हॉकी टीमें एक बार फिर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के लिए आमने-सामने हैं।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ 32 साल बाद एशियन गेम्स के फाइनल में खिताब के लिए मैदान में उतर चुकी हैं। दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि खिताब जीतने वाली टीम को सीधे 2016 रियो ओलंपिक में जगह मिल जाएगी।
कुछ दिन पहले भी लीग मैच में पाक टीम भारत पर 2-1 से जीत दर्ज कर चुकी है और ऐसे में उसका मनोबल बढ़ा हुआ है। बावजूद इसके कप्तान सरदार सिंह एंड कंपनी अपनी गलतियों में सुधार करते हुए स्वर्ण पदक जीतने के लिए कमर कस चुकी है।
32 साल पहले हार का बदला भी चुकाना चाहेगा भारत
एशियन गेम्स के फाइनल में भारतीय टीम आखिरी बार पाकिस्तान से 1982 में नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में भिड़ी थी। इस मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को 7-1 से करारी शिकस्त दी थी।
यह वही मैच था जिसमें गोलकीपर मीर रंजन नेगी पर अंगुली उठी थी। कुछ दिन पहले भी लीग मैच में पाक टीम भारत पर 2-1 से जीत दर्ज कर चुकी है और ऐसे में उसका मनोबल बढ़ा हुआ है।
भारत और पाकिस्तान के बीच एशियन गेम्स में कुल 6 मुकाबले हो चुके हैं जिसमें से 2 भारत और 4 पाक ने जीते हैं। भारत ने आखिरी बार पाकिस्तान को 1966 बैंकाक एशियन गेम्स में शिकस्त दी थी।
भारत ने आखिरी बार पाकिस्तान को 1966 बैंकाक एशियन गेम्स में शिकस्त दी थी। ऐसे में भारतीय टीम पर दबाव काफी होगा। अब देखना है कि भारतीय टीम दबाव से पार पाते हुए किस तरह से नया इतिहास रचती है।
आठ साल बाद महिला टीम ने जीता कांस्य
इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम ने जापान को 2-1 से शिकस्त देकर एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता। आठ साल के लंबे अंतराल के बाद भारतीय महिलाओं ने एशियन गेम्स में कोई पदक जीता है जबकि इन खेलों के इतिहास में उसका यह कुल तीसरा कांस्य पदक है।
विश्व में 13वें नंबर पर स्थित भारतीय टीम ने अपने से ऊंची 10वीं रैंकिंग वाली जापान से 2010 एशियन गेम्स में मिली हार का बदला भी चुकता किया। गुआंग्झू में जापान ने कांस्य पदक के मुकाबले में भारतीय टीम को 1-0 से हराया था।
भारत के लिए ड्रैग फ्लिक विशेषज्ञ जसप्रीत कौर ने 23वें जबकि वंदना कटारिया ने 42वें मिनट में गोल दागा। वहीं जापान के लिए एकमात्र गोल अकाने शिबाता की स्टिक से 41वें मिनट में निकला। भारत को कांस्य जीतने के लिए जापान से कड़ा मुकाबला करना पड़ा।