सार
भारत 168 खिलाड़ियों के दल के साथ पैरा एशियन गेम्स में हिस्सा लेगा और 2023 में जीते गए 111 पदकों के रिकॉर्ड को तोड़ने का लक्ष्य रखेगा। पैरा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी और निशानेबाजी में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद है।
भारत रविवार से शुरू हो रहे पैरा एशियन गेम्स में अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ने के इरादे से उतरेगा। हालांकि, इस बार भारतीय दल का आकार पहले के मुकाबले काफी छोटा है। इसके अलावा पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों ने भी खेलों से पहले माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत के लिए 2023 में जीते गए 111 पदकों की उपलब्धि को दोहराना एक बड़ी चुनौती होगी। भारत ने चीन के हांगझोउ में 2023 में आयोजित पिछले पैरा एशियन गेम्स में 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य सहित कुल 111 पदक जीते थे। यह इन खेलों में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इस बार भारतीय खिलाड़ी इस रिकॉर्ड को बेहतर करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेंगे।
पैरा एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल
- फोटो : SAI
303 से घटकर 168 हुआ भारतीय दल
आइची-नागोया में आयोजित होने वाले इन खेलों में भारत ने 11 खेलों के लिए 168 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जबकि हांगझोउ में भारत की ओर से 303 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भागीदारी के लिए कड़े किए गए कोटे और खेल कार्यक्रमों में बदलाव के कारण भारतीय दल के आकार में कमी आई है। खिलाड़ियों की संख्या में आई इस गिरावट का असर पदकों की कुल संख्या पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत की सफलता काफी हद तक अनुभवी पदक विजेताओं के प्रदर्शन और नए खिलाड़ियों की महाद्वीपीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी। आधिकारिक उद्घाटन समारोह से पहले ही भारतीय खिलाड़ी पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस, बोकिया और दृष्टिबाधित फुटबॉल में अपने अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।
पैरा एथलेटिक्स से सबसे ज्यादा उम्मीदें
हांगझोउ पैरा एशियन गेम्स में भारत ने पैरा एथलेटिक्स में 18 स्वर्ण सहित कुल 55 पदक जीते थे। इस बार भी एथलेटिक्स भारतीय दल के लिए पदकों का बड़ा स्रोत बन सकता है। हालांकि, इस स्पर्धा में भारत के खिलाड़ियों की संख्या 123 से घटकर 62 रह गई है। पैरालंपिक चैंपियन और विश्व रिकॉर्डधारी भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल से स्वर्ण पदक की उम्मीद होगी। ऊंची कूद में निषाद कुमार, फर्राटा दौड़ में प्रीति पाल और क्लब थ्रो में धरमबीर सिंह भारतीय चुनौती को मजबूती देंगे।
तीरंदाजी, बैडमिंटन और निशानेबाजी पर नजर
तीरंदाजी में भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी और पायल नाग से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, पैरालंपिक रिकर्व चैंपियन हरविंदर सिंह और विश्व चैंपियन तोमान कुमार भी पदक के दावेदारों में शामिल हैं। पैरा बैडमिंटन में कई बार के चैंपियन प्रमोद भगत और सुहास एलवाई पर भारत की उम्मीदों का बड़ा दारोमदार होगा। निशानेबाजी में पैरालंपिक चैंपियन अवनि लेखरा भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगी। पैरा टेबल टेनिस में टोक्यो पैरालंपिक की रजत पदक विजेता भाविना पटेल से भी पदक की आस रहेगी।
पैरा एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल
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चयन प्रक्रिया पर विवाद से बढ़ी मुश्किलें
खेलों से पहले पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आए हैं। करीब 150 पैरा निशानेबाजों ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) से कथित वित्तीय अनियमितताओं, वसूली और चयन संबंधी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झाझड़िया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई। वहीं, खेल मंत्रालय ने निशानेबाजी टीम के मुख्य कोच को दल से हटाकर उनकी जगह दूसरे कोच को शामिल किया। इस फैसले का कई प्रमुख निशानेबाजों ने विरोध किया। पैरा साइकिलिंग में भी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। संयुक्त चयन समिति ने छह साइकिलिस्ट का चयन किया था, लेकिन खेल मंत्रालय ने केवल अरशद शेख के नाम को मंजूरी दी।
अनुभवी खिलाड़ियों और नए चेहरों पर टिकी निगाहें
भारतीय दल के सामने इस बार चुनौती केवल पदकों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि सीमित खिलाड़ियों के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की भी है। एक ओर सुमित अंतिल, अवनि लेखरा, प्रमोद भगत और भाविना पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों से पदक की उम्मीदें हैं, तो दूसरी ओर नए खिलाड़ियों के पास बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका होगा। अब देखना होगा कि छोटा भारतीय दल विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हांगझोउ के 111 पदकों के रिकॉर्ड को पार कर पाता है या नहीं।