एशियन गेम्स: भारतीय निशानेबाजों का एशियाड में स्वर्ण का संघर्ष जारी, पिछले प्रदर्शन को दोहराना कितना कठिन?
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Fri, 25 Sep 2026 06:22 AM IST
सार
भारतीय दल ने एशियन गेम्स के पांचवें दिन भी पदक जीतने का सिलसिला जारी रखा है। लेकिन भारतीय निशानेबाज स्वर्ण पदक के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण की काफी उम्मीदें हैं, लेकिन अब तक भारतीय निशानेबाज गोल्ड पर निशाना नहीं साध सके हैं।
शूटिंग
- फोटो : SAI Media
आइची-नागोया में आयोजित हो रहे एशियन गेम्स के शुरुआती पांच दिनों तक भारतीय निशानेबाजों का स्वर्ण पदक जीतने का संघर्ष जारी रहा। भारत ने हालांकि, इन खेलों में पदक तो कई जीते हैं, लेकिन अब तक शूटिंग में स्वर्ण नहीं आया है। भारत को हमेशा की तरह इस बार भी अपने निशानेबाजों से अधिक से अधिक पदक जीतने की उम्मीद है। स्टार निशानेबाज मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में पदक नहीं जीत पाईं। हालांकि, उनके पास अभी 25 मीटर में मौका रहेगा।
शूटिंग
- फोटो : SAI Media
आइची-नागोया में आयोजित हो रहे एशियन गेम्स के शुरुआती पांच दिनों तक भारतीय निशानेबाजों का स्वर्ण पदक जीतने का संघर्ष जारी रहा। भारत ने हालांकि, इन खेलों में पदक तो कई जीते हैं, लेकिन अब तक शूटिंग में स्वर्ण नहीं आया है। भारत को हमेशा की तरह इस बार भी अपने निशानेबाजों से अधिक से अधिक पदक जीतने की उम्मीद है। स्टार निशानेबाज मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में पदक नहीं जीत पाईं। हालांकि, उनके पास अभी 25 मीटर में मौका रहेगा।
इलावेनिल वलारिवन
- फोटो : https://www.olympics.com/
अब तक शूटिंग में कौन-कौन लाया पदक
हिमांशू ढिल्लों ने 10 मीटर राइफल व्यक्तिगत में रजत पदक जीता। वहीं, 10 मीटर एयर राइफल महिला टीम को भी रजत मिला।
पुरुष 10 मीटर राइफल टीम और 10 मीटर एयर राइफल महिला व्यक्तिगत वर्ग में इलावेनिल वलारिवान ने रजत पदक दिलाया।
10 मीटर एयर राइफल पुरुष व्यक्तिगत वर्ग में रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटिल ने भारत का कांस्य पदक दिलाया।
भारतीय पुरुष और महिला स्कीट तथा स्कीट मिक्सड टीम ने भारत को कांस्य पदक दिलाए। इस तरह भारत को आइची-नागोया एशियन गेम्स में अब तक चार रजत और चार कांस्य पदक मिले हैं। लेकिन स्वर्ण का इंतजार जारी है।
पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल में मिली निराशा
एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाज गुरुवार को भी स्वर्ण नहीं ला पाए। देश की पारंपरिक रूप से मजबूत स्पर्धाओं में शुमार पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम भी पदक जीतने में नाकाम रही। कमलजीत 580 अंक के साथ नौवें स्थान पर रहे और फाइनल में जगह बनाने से सिर्फ एक अंक से चूक गए। आकाश भारद्वाज ने 579 अंक के साथ 11वां और केदारलिंग ने 568 अंक के साथ 35वां स्थान हासिल किया। भारतीय टीम ने कुल 1727 अंक जुटाए। जापान ने 1730 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया। चीन ने 1743 अंक के साथ स्वर्ण और इंडोनेशिया ने इतने ही अंक के साथ रजत पदक जीता। चीन ने अधिक इनर-10 के आधार पर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
केदारलिंग के प्रदर्शन में मुकाबले के दौरान लगातार गिरावट आई। वह अंक हासिल करने के लिए अपनी पिस्टल की सेटिंग भी बदलते नजर आए, लेकिन इसका खास फायदा नहीं हुआ। आखिरी चरण में उनके एक शॉट में आठ अंक आने के बाद भारत की टीम पदक की दौड़ से बाहर हो गई। निशानेबाजी में लगातार पांच दिन का खेल पूरा होने के बावजूद भारत के खाते में अब तक एक भी स्वर्ण पदक नहीं आया है। एशिया की इस मजबूत निशानेबाजी टीम के लिए यह असामान्य सूखा है, हालांकि उसने अब तक चार रजत और चार कांस्य पदक जरूर जीते हैं।
आकाश, आकाश और केदारलिंग
- फोटो : SAI Media
केदारलिंग के प्रदर्शन में लगातार गिरावट
पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल की क्वालिफिकेशन में भी कोई खास राहत नहीं मिली। कमलजीत आखिरी दौर तक फाइनल की दौड़ में बने रहे, लेकिन एक अंक से चूक गये। भारद्वाज भी फाइनल में प्रवेश के बेहद करीब रहे, लेकिन कट में जगह नहीं बना पाए। केदारलिंग की मुश्किलें हलांकि कहीं अधिक गंभीर रहीं। भारतीय सेना के निशानेबाज केदारलिंग ने लगभग शुरुआत से ही संघर्ष किया। वह लगातार अंक गंवाते रहे और प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए जरूरी ऊंचे स्कोर हासिल करने में भी नाकाम रहे। प्रदर्शन बिगड़ता देख उन्होंने समाधान की तलाश में अपनी पिस्टल की सेटिंग बदलनी शुरू कर दी। दर्शक दीर्घा में मौजूद भारतीय कोच उन्हें लेकर स्पष्ट रूप से चिंतित नजर आए।
इस बीच हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर पियरे ब्यूशां दर्शक दीर्घा में लगातार चहलकदमी करते रहे और केदारलिंग अपने खराब प्रदर्शन को थामने की कोशिश करते रहे। इन बदलावों का उनकी स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ा। केदारलिंग की निशानेबाजी में लगातार अनिश्चितता बनी रही। उनके खाते में नौ अंक वाले शॉट ज्यादा आ रहे थे, जबकि ऊंचे स्कोर वाले निशाने बेहद कम थे। मुकाबला अंतिम चरण में पहुंचा तो भारत के लिए टीम कांस्य पदक बचाने की उम्मीद लगभग खत्म होने के कगार पर थी। मुकाबले में एक असाधारण मोड़ आया। टीम पदक की स्थिति बेहद करीबी होने के बीच जापानी कोचिंग स्टाफ के कुछ सदस्य दर्शक दीर्घा में केदारलिंग के पीछे आकर खड़े हो गए। वे उनके आखिरी शॉट देख रहे थे और उम्मीद कर रहे थे कि भारतीय निशानेबाज इतने अंक गंवा दें कि उनकी टीम कांस्य पदक की स्थिति में पहुंच जाए। अपने आखिरी 10 शॉटों के क्रम में आठ अंक का एक शॉट भारत की पदक उम्मीदों के लिए निर्णायक साबित हुआ और जापान के लिए पदक का रास्ता खोल गया।
जापानी कोच वहां से स्पष्ट रूप से संतुष्ट नजर आए, क्योंकि केदारलिंग की आखिरी चूक ने उनकी टीम को पदक की स्थिति में पहुंचा दिया था। जापान ने 1730 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया और भारत से तीन अंक आगे रहा। चीन ने 1743 अंकों के साथ इनर-10 स्कोर से टीम स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंडोनेशिया ने भी 1743 अंक हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया। व्यक्तिगत क्वालिफिकेशन में शीर्ष पर इंडोनेशिया के मुहम्मद इकबाल राजा प्रबोवो रहे। उन्होंने 589 का शानदार स्कोर बनाया। वह दूसरे स्थान पर रहे चीन के निशानेबाज से छह अंक आगे रहे, जिसने 583 अंक हासिल किए। केदारलिंग गुस्से और निराशा में रेंज से बाहर निकले, जबकि भारतीय खेमे को एक और निराशाजनक नतीजे को स्वीकार करना पड़ा।
शूटिंग
- फोटो : IANS
पिछले प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीदों को झटका
इससे पहले भारत की स्टार खिलाड़ियों से सजी महिला 10 मीटर एयर पिस्टल टीम भी फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रही थी। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर तथा विश्व कप की स्वर्ण पदक विजेता ईशा सिंह और सुरूचि सिंह की तिकड़ी से काफी उम्मीदें थीं। लगातार दो दिनों की इन निराशाओं ने 2023 हांग्झू एशियाई खेलों में निशानेबाजी के सात स्वर्ण समेत 22 पदकों के अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को दोहराने की भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
एशियन गेम्स में शूटिंग में भारत को मिले पदक
| खेल |
स्वर्ण |
रजत |
कांस्य |
कुल |
| 1962 जकार्ता |
0 |
0 |
1 |
1 |
| 1974 तेहरान |
0 |
1 |
1 |
2 |
| 1978 बैंकॉक |
1 |
0 |
0 |
1 |
| 1982 नई दिल्ली |
0 |
2 |
1 |
3 |
| 1986 सियोल |
0 |
1 |
2 |
3 |
| 1990 बीजिंग |
0 |
0 |
1 |
1 |
| 1994 हिरोशिमा |
1 |
0 |
1 |
2 |
| 1998 बैंकॉक |
0 |
2 |
1 |
3 |
| 2002 बुसान |
0 |
2 |
0 |
2 |
| 2006 दोहा |
3 |
5 |
6 |
14 |
| 2010 ग्वांगझू |
1 |
3 |
4 |
8 |
| 2014 इंचियोन |
1 |
1 |
7 |
9 |
| 2018 जकार्ता-पालेमबांग |
2 |
4 |
3 |
9 |
| 2022 हांग्झू |
7 |
9 |
6 |
22 |
| कुल |
16 |
30 |
34 |
80 |
नोट: इस सूची में 2026 आइची-नागोया के पदक नहीं जोड़े गए हैं।
भारत के डेटा-आधारित प्रदर्शन विश्लेषण की जिम्मेदारी संभालने वाले ब्यूशां ने तत्काल टीम के प्रदर्शन का विश्लेषण करने से इनकार कर दिया। वह निशानेबाजों के प्रदर्शन की बारीकी से निगरानी, वीडियो रिकॉर्डिंग और शारीरिक आंकड़ों के विश्लेषण के साथ-साथ खेल-विज्ञान के समन्वय, मानसिक नियंत्रण और व्यापक प्रदर्शन प्रणाली के निर्माण की देखरेख करते हैं। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में निशानेबाजी की स्पर्धाएं समाप्त होने के बाद ही वह इस पर बात करेंगे। उन्होंने कहा, मैं अभी इस बारे में बात नहीं कर सकता। खेलों में भारत की प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद ही मैं इस पर बात करूंगा।