बॉक्सिंग की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था आईबा की ओर से भारतीय बॉक्सरों की एंट्री स्वीकार नहीं किए जाने के फरमान ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। बुल्गारिया में अगले माह होने वाले स्टेल्जा कप के लिए भारतीय बॉक्सरों की एंट्री स्वीकार नहीं की गई है।
यही नहीं जर्मनी होने वाले प्रतिष्ठित टूर्नामेंट केमेस्ट्री कप और चेक रिपब्लिक में होने वाले उस्ती नाद ला बेम ग्रांप्री के लिए भी भारतीय बॉक्सरों के भाग लेने पर कोई जवाब नहीं दिया गया है। सिर्फ हंगरी में होने वाले एक टूर्नामेंट के लिए बॉक्सरों की एंट्री मांगी गई है। लेकिन यह एंट्री साई या फिर प्रतिबंधित फेडरेशन के जरिए भेजी जाए इस पर फैसला नहीं हो सका है।
एनआईएस पटियाला में तैयारियों में जुटे सीनियर बॉक्सरों को फरवरी से अप्रैल माह तक चार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शिरकत करनी है। इनमें बुल्गारिया, जर्मनी व चेक रिपब्लिक में होने वाले टूर्नामेंट नामी हैं। केमेस्ट्री कप व उस्ती नाद ला बेम में भारतीय बॉक्सर प्रत्येक वर्ष भाग लेते हैं। यहां उनका प्रदर्शन भी शानदार रहा है। लेकिन स्टेल्जा कप के लिए आयोजनकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि वह आईबा के प्रतिबंध के चलते उनकी एंट्री स्वीकार नहीं करने जा रहे हैं।
वहीं चेक रिपब्लिक की ओर से कहा गया है कि भारतीय बॉक्सर ट्रेनिंग के लिए तो आ सकते हैं लेकिन टूर्नामेंट में भाग लेने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है। जबकि केमेस्ट्री कप के आयोजनकर्ताओं ने भेजी गई एंट्री के बारे में कोई बात ही नहीं की है।
आईबा की ओर से साफ किया गया था कि वह प्रतिबंधित फेडरेशन की जगह खेल मंत्रालय से बात करेंगे। लेकिन मंत्रालय को भी कह दिया गया है कि बॉक्सरों की एंट्री अब स्वीकार नहीं की जाएगी। सूत्र बताते हैं कि साई की ओर से इस संबंध में आईबा को पत्र भी भेजा गया है। लेकिन अब तक उसका कोई जवाब नहीं आया है।
हंगरी में होने वाले टूर्नामेंट की एंट्री साई के जरिए भेजने पर इसी के चलते निर्णय नहीं हो पा रहा है। साई को उनकी ओर से भेजे गए पत्र के जवाब का इंतजार है। इसके बाद ही उनकी ओर से एंट्री भेजने पर निर्णय लिया जा सकता है। लेकिन इन हालातों में भारतीय बॉक्सरों का नुकसान हो रहा है।