खेल मंत्रालय ने उसकी गाइडलाइंस के खिलाफ चुनाव कराने वाले खेल संघों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए कमर कस ली है। सबसे पहली गाज आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएआई) पर गिर सकती है। मंत्रालय ने मन बना लिया है कि एएआई के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए खड़े आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष विजय मल्होत्रा के जीतने की सूरत में तत्काल प्रभाव से संघ को दी जा रही सरकारी सहायता बंद कर दी जाएगी। इस सूरत में न आर्चरी का सरकारी सहायता से कोई कैंप लग सकेगा और न ही टीमें बाहर जा सकेंगी। यही नहीं आर्चरी से अर्जुन और द्रोणाचार्य अवार्ड का नाता भी खत्म हो जाएगा।
पिछले 33 सालों से एएआई के अध्यक्ष पद पर विराजमान मल्होत्रा खेल मंत्रालय के विरोध के बावजूद नौ नवंबर को होने वाले चुनाव में इस पद पर फिर दावा जता रहे हैं। यह मंत्रालय की गाइडलाइंस के खिलाफ है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मल्होत्रा को बता दिया गया है कि वह चुनाव में नहीं उतरें। बावजूद इसके वह चुनाव लड़ रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि यही कारण है कि मल्होत्रा अगर शुक्रवार को होने वाले चुनाव में जीतते हैं तो इसे अवैध घोषित कर आर्चरी को दी जा रही सारी सरकारी सहायता पर रोक लगा दी जाएगी। लंदन ओलंपिक की तैयारियों के लिए मंत्रालय ने इस खेल पर सात करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। हालांकि मल्होत्रा पहले कह चुके हैं कि वह आर्चरी प्रायोजकों के दम पर चलाएंगे। लेकिन यह संभव नहीं दिखाई दे रहा है।
मल्होत्रा को चुनाव में बीवीपी राव चुनौती दे रहे हैं जबकि राव ने सीनियर वाइस प्रेसीडेंट के लिए खड़े उनके साथी तरलोचन सिंह और ट्रेजरार पद पर भी अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। मंत्रालय को आईओए चुनाव में अध्यक्ष पद पर खड़े हो रहे अभय चौटाला की उम्मीदवारी पर भी एतराज है। उनके जीतने की स्थिति में मंत्रालय से खींचतान की स्थिति पैदा हो सकती है।