साल 1928 में हॉलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में ओलंपिक खेल होने थे। भारत की पहली राष्ट्रीय टीम चुनने के लिए देश की कई टीमों के बीच मैच करवाए गए। ध्यानचंद संयुक्त प्रांत की ओर से खेले और चुने गए, लेकिन हॉकी संघ उस समय सिर्फ इतना ही रुपए जुटा पाया था जिससे 11 खिलाड़ी ही एम्सटर्डम जा सकते थे। बाकी 2 खिलाड़ियों को नहीं भेजा जा सकता था। इन दो खिलाड़ियों की मदद के लिए तब बंगाल हॉकी संघ आगे आया था। ध्यानचंद अपने खेले की बदौलत पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए थे। विदेश में एक बार एक युवती उनको किस करने का प्रस्ताव भी दिया था।
मेजर ध्यानचंद से प्रभावित होकर उनके भाई रूप सिंह भी हॉकी खेलने लगे और एक अच्छे खिलाड़ी बन गए। फिर वो मौका आया, जब दोनों भाई साथ में ओलंपिक खेले। 1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में दोनों भाई साथ खेले।
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सेना की तरफ से ध्यानचंद और संयुक्त प्रांत की ओर से रूप सिंह लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम में चुने गए। लेकिन इस बार भी रुपयों की दिक्कत हुई, तो पंजाब नेशनल बैंक ने मदद की। हालांकि वह रकम भी जाने के लिए काफी न थी। फिर बंगाल हॉकी संघ ने मदद का हाथ बढ़ाया। ध्यानचंद ने इस ओलंपिक में भी ताबड़तोड़ गोल करते हुए टीम को जीत दिलाई। 14 अगस्त 1932 को अमेरिका के साथ फाइनल मैच में टीम ने 1 के मुकाबले 24 गोल दागकर जीत हासिल की। इसके साथ ही भारत एक बार फिर विश्व विजेता बना।
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जब विदेशी महिला ने कहा, मे आई किस यू?
जर्मनी ने एक बार भारत को मैसेज भिजवाया कि अगर आपकी टीम हमारे यहां आएगी तो खर्चा हम उठाएंगे। फिर भारतीय टीम ने वहां कई मैच खेले और आखिरी मैच में बर्लिन को 11-4 के अंतर से हराया। अब तक ताे विदेशी भी ध्यानचंद के दीवाने हो गए थे। चेकोस्लोवाकिया में ध्यानचंद के खेल से इम्प्रेस होकर एक युवती उनके पास अाकर बोली, 'तुम किसी एजेंल की तरह लगते हो, क्या मैं तुम्हें किस कर सकती हूं?' ये सुनते ध्यानचंद सकपका गए और बोले, 'सॉरी मैं शादीशुदा हूं। मुझे माफ करें।'
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