भारतीय पुरुष हॉकी टीम के फॉरवर्ड खिलाड़ी गुरजंत सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित हॉकी इंडिया पुरस्कार समारोह में अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास की घोषणा की। 31 साल के स्टार ने भारतीय टीम के लिए 130 मैचों में 33 गोल किए। 26 जनवरी 1995 को अमृतसर के खैलारा में जन्मे गुरजंत के मन में बचपन से ही हॉकी के प्रति लगाव था। इस खेल में बेहतर बनने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। गुरजंत ने 2016 में लखनऊ में फाइनल में गोल करते हुए भारत की जूनियर विश्व कप जीत में अहम भूमिका निभाई थी। 2017 में गुरजंत ने सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया था।
अर्जुन पुरस्कार से किया गया था सम्मानित
गुरजंत की सबसे बड़ी उपलब्धियां ओलंपिक मंच पर सामने आईं, जहां वे टोक्यो 2020 और पेरिस 2024, दोनों ही ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीमों का एक अहम हिस्सा थे। ओलंपिक के अलावा गुरजंत ने भारत को 2022 हांगझोऊ एशियाई खेलों में स्वर्ण, 2017 एशिया कप में स्वर्ण और कई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीतने में मदद की। 2021 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारत के सर्वोच्च खेल सम्मानों में से एक है।
साथियों के साथ बिताए समय को बताया सबसे बढ़कर
अपने संन्यास की घोषणा करते हुए गुरजंत ने कहा, आज मैं गर्व और गहरी भावनाओं के साथ अपने संन्यास की घोषणा करता हूं। मैंने अपनी हॉकी यात्रा की शुरुआत इस कमरे में बैठे अपने सीनियर खिलाड़ियों को आदर्श मानकर की थी और उनके साथ भारत के लिए खेलने का अपना सपना पूरा करना मेरे लिए एक ऐसी अनमोल याद है जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा।
उन्होंने कहा, भारतीय हॉकी के ऐतिहासिक पुनरुद्धार का हिस्सा बनकर और दो ओलंपिक पदक हासिल करके मुझे बेहद संतुष्टि महसूस हो रही है। ट्रॉफियों से बढ़कर, सबसे बड़ी याद जो मैं अपने साथ ले जा रहा हूं वह है अपने साथियों के साथ बिताया गया समय। हम एक परिवार की तरह रहे, और हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का साथ दिया। मैं हॉकी इंडिया का धन्यवाद करना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे इतनी सम्मानजनक विदाई दी। मैं अंतरराष्ट्रीय मंच से एक बहुत ही खुश और गर्वित इंसान के तौर पर विदा ले रहा हूं।
टिर्की ने की सराहना
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, गुरजंत सिंह लगभग एक दशक से भारत की हॉकी कहानी का एक अहम हिस्सा रहे हैं। उनकी रफ्तार, उनकी ऊर्जा और बड़े मौकों पर गोल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक ऐसा खिलाड़ी बनाया जिससे विरोधी हमेशा डरते थे। उन्होंने बड़े गर्व के साथ अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय हॉकी को उन्होंने जो कुछ भी दिया है, उसके लिए हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं।