मैदान पर दुश्मनी रही हो तो क्या हुआ पर पाकिस्तानी हॉकी दिग्गजों हसन सरदार और अख्तर रसूल ने जैसे ही यह सुना कि मुहम्मद शाहिद नहीं रहे तो उनके लिए यह किसी निजी क्षति जैसी खबर थी। फिर क्या था तबियत ठीक नहीं होने के बावजूद अपनी स्टिक से दुनिया को छकाने वाले हसन सरदार उनकी यादों में खो गए।
अपने जमाने के नामी-गिरामी सेंटर हॉफ अख्तर रसूल को तुरंत शाहिद का 1978 में पहला पाकिस्तानी दौरा याद आया। रसूल ने खुलासा किया कि बांए छोर से उनका क्रास इतना झन्नाटेदार होता था कि उनकी रक्षा पंक्ति को इसे रोकना आसान नहीं होता था।
लाहौर के पहले टेस्ट मैच में शाहिद ने ऐसा ही एक क्रास बांए छोर से फेंका नामी फॉरवर्ड मंजूर जूनियर ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह इसे नहीं रोक पाए और गेंद उनकी टांग पर लगी। मंजूर को मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। बाद में पता लगा कि उनकी टांग टूट गई है। वह कई महीनों तक हॉकी के मैदान से बाहर रहे।