देश को तीन ओलंपिक में लगातार स्वर्ण पदक दिलाने वाले हॉकी के जादूगर ध्यानचंद ने अपने करियर में कई मैच जीते। लेकिन उन्हें जो मैच उनके पूरे जीवन में सर्वश्रेष्ठ लगा वह ओलंपिक का नहीं था।
ध्यानचंद को 1933 में खेला गया बेइग्टन कप का फाइनल सबसे बेस्ट लगा। यह मैच कलकत्ता कस्टम और झांसी हीरोज के बीच खेला गया था। ध्यानचंद ने इस मैच के बारे में कहा था, 'अगर कोई मुझसे पूछे कि आपको अब तक सबसे बेस्ट मैच कौन सा लगा तो मैं बेझिझक 1933 के विघटन कप को अपना सबसे बेस्ट मैच कहूंगा'।
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ध्यानचदं हॉकी के काफी नजदीक थे। 1932 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में टीम इंडिया ने अमेरिका को 24-1 के अंतर से हराया वहीं जापान को 11-1 के अंतर से हराया है। दोनों मैचों में कुल 35 गोल में से 25 गोल ध्यानचंद और रूप सिंह ने मिलकर किए थे। ध्यानचंद ने 12 और रूप सिंह ने 13 गोल किए थे। रूप सिंह ध्यानचंद के भाई थे। दोनों हॉकी के जुड़वा भाई कहे जाते थे।
एक बार जब ध्यानचंद एक मैच में गोल नहीं कर पा रहे थे तो उन्होंने गोल पोस्ट को लेकर रेफरी से बहस कर डाली। बाद में सबको समझ में आया कि ध्यानचंद ने सही वजह को लेकर रेफरी से बहस की थी। दरअसल ध्यानचंद की आपत्ति के बाद जब जांच की गई तो पाया गया कि गोल पोस्ट की चौड़ाई निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानक से कम थी।
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