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पिता चलाते हैं तांगा और अब बेटी ने एशियन गेम्स में फहराया तिरंगा, रानी रामपाल के संघर्ष की कहानी

Sun, 02 Sep 2018 08:43 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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18वें एशियन गेम्स का समापन हो चुका है। जकार्ता और पालेमबांग में हुए इन खेलों के समापन समारोह में भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल को भारतीय दल का ध्वजवाहक चुना गया था। इसी के साथ वो इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनीं। रानी का बचपन काफी मुसीबतों से गुजरा है। रानी के पिता तांगा चलाकर गुजर बसर कर रहे हैं। आइए जानते हैं हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल के बारे में...
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रानी रामपाल का जन्म हरियाणा के शाहबाद मारकंडा में 1994 में हुआ। रानी अपने भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं और उनकी संघर्ष की कहानी काफी लंबी है। रानी रामपाल के पिता परिवार चलाने के लिए तांगा चलाते हैं। 
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दो बड़े भाई किसी दुकान में काम करते हैं। लेकिन तमाम दुश्वारियों को दरकिनार करते हुए रानी ने खेल के क्षेत्र में अपना करियर बनाकर परिवार और देश का नाम रोशन किया। 

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महिला हॉकी टीम में जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ रानी ने अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। साल 2010 विश्व कप में भाग लेने वाली वो भारतीय हॉकी टीम की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं। उस वक्त रानी रामपाल की उम्र महज 15 साल थी। इसके बाद रानी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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- फोटो : amarujala
बेहतर प्रदर्शन का नतीजा ही रहा कि रानी को रेलवे में क्लर्क की नौकरी मिल गई। नौकरी मिलने के बाद रानी ने पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया। 10 साल की उम्र में ही रानी ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। 
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2010 में 15 साल की उम्र में वह महिला हॉकी विश्व कप में सबसे युवा खिलाड़ी बनीं। इसके बाद जूनियर हॉकी विश्व कप 2013 में रानी रामपाल को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। अर्जेंटीना में हुए महिला हॉकी विश्व कप में सात गोल दागकर रानी ने सर्वश्रेष्ठ यंग फॉरवर्ड खिलाड़ी का अवॉर्ड अपने नाम किया था।
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रानी रामपाल ने साल 2009 में एशिया कप में भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में अहम योगदान दिया था। 2013 में जूनियर हॉकी महिला टीम ने कांस्य पदक जीता था। विश्व कप प्रतियोगिता में ये भारत का 38 साल बाद मिलने वाला पदक था।
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मौजूदा एशियाई खेलों में 23 वर्षीय इस खिलाड़ी की अगुवाई में  भारतीय महिला हॉकी टीम ने 20 साल बाद रजत पदक जीता है। फाइनल में जापान से 1-2 से हार के कारण 36 साल बाद स्वर्ण पदक जीतने से भारतीय टीम चूक गई।
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