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टीम का फोकस महिला हॉकी विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर: मराइन

Sat, 21 Jul 2018 08:34 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला
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Sjoerd Marijne
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गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के बाद राष्ट्रीय हॉकी कोचों की अदला -बदली के करीब आठ महीने बाद सोएर्ड मराइन ने फिर से भारत की महिला टीम को अपने मार्गदर्शन में लंदन में होने वाले महिला हॉकी विश्व कप की चुनौती से पार पाने के लिए तैयार किया है। मराइन ने 'अमर उजाला' से कहा, 'वह हॉकी इंडिया के पुरुष टीम की बजाय फिर से महिला हॉकी टीम को कोचिंग देने की जिम्मेदारी को बड़ी चुनौती के रूप में लेते हैं।'

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'महिला हॉकी विश्व कप और एशियाई खेल, दोनों ही भारतीय टीम के लिए खासे अहम हैं।  महिला विश्व कप दुनिया का सबसे बड़ा हॉकी टूर्नामेंट और सबसे बड़ी चुनौती है। दुनिया की बेहतरीन टीमों और उसकी हर खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में खेलने के लिए चार बरस तक इंतजार करती हैं। इनी गिनी खुशकिस्मत खिलाडिय़ों को जिंदगी में बमुश्किल विश्व कप में खेलने का मौका मिल पाता है। 

एक से ज्यादा विश्व कप में खेलने वाली खिलाड़ी कम ही होती हैं। हमारी भारतीय महिला हॉकी टीम इसमें आठ बरस के बाद शिरकत कर रही है। हमारी टीम की सभी खिलाडिय़ों का फोकस महिला हॉकी विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर हैं। इसमें हमारा पहला इम्तिहान इंग्लैंड के खिलाफ है और हमारी सभी लड़कियां जेहनी तौर पर इसके लिए तैयार है। 
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मैंने अपनी टीम की लड़कियों से कहा कि उनमें दुनिया की किसी भी टीम को हराने का दम है। महिला विश्व कप में हमारा पहला लक्ष्य मकसद है क्वॉर्टर फाइनल में स्थान बनाना है और हमारी सभी खिलाडिय़ों में इस मकसद को पाने का विश्वास भी है।  एक बार क्वॉर्टर फाइनल में पहुंच गए तो फिर कुछ भी मुमकिन है। हमारी टीम की बड़ी ताकत यह है कि सभी एक इकाई के रूप में खेल रही हैं। 

हर सीनियर खिलाड़ी टीम की जूनियर खिलाड़ी को साथ लेकर उसका मार्गदर्शन कर बेहतरीन खेल के लिए प्रेरित करती है। भारतीय टीम अनुभवी और नौजवान खिलाडिय़ों की एक बेहद संतुलित टीम है। कप्तान स्ट्राइकर रानी रामपाल व वंदना कटारिया, डिफेंडर दीपिका  ठाकुर, गोलरक्षक सविता पूनिया का अनुभव भारतीय महिला हॉकी टीम के बहुत काम आएगा।' 

वह कहते हैं, 'हमें लंदन महिला हॉकी विश्व कप में खेलने के लिए लौटने के एक पखवाड़े से भी कम के भीतर जकार्ता में एशियाई खेलों में खेलने जाना है। फिर भी हमारी टीम पहले अपना पूरा ध्यान विश्व कप पर इसलिए लगा रही है क्योंकि इसके लिए क्वॉलिफाई करने के लिए खासी मेहनत की है। ऐसे में इसमें बढिय़ा प्रदर्शन करना है।' 

'हम विश्व कप में अच्छा खेले तो एशियाई खेलों के लिए हमारी टीम बुलंद इरादों के साथ उतरेगी क्योंकि इसमें दुनिया की बेहद मजबूत टीमें खेलेंगी। हमारे पास कप्तान रानी रामपाल, वंदना कटारिया, नवनीत कौर के रूप में अनुभवी अग्रिम पंक्ति तो है ही ही ललरेमसियामी के रूप में मौकों को भुनाने वाली स्ट्राइकर हैं। हमारी खुशकिस्मती यह हमारी हर स्ट्राइकर की अपनी खास शैली और ताकत है। इसी कारण हमारी अग्रिम पंक्ति को रोकना हर प्रतिद्वंद्वी के लिए खासी बड़ी चुनौती होगा।' 

मध्यपंक्ति में खासतौर नमिता टोपो और लिलिमा मिंज जैसे ऑलराउंडर के रूप में आक्रमण और रक्षण की मजबूत कड़ी हैं। रक्षापंक्ति में हमारे पास दीपिका ठाकुर, सुनीता लाकड़ा तो हैं ही गुरजीत कौर जैसी चतुर ड्रैग फ्लिकर हैं। हमारे पास ड्रैग फ्लिकर के रूप में अकेले गुरजीत कौर ही नहीं हैं हमारे पास और भी विकल्प हैं लेकिन इस बाबत में अपने बाकी पत्ते नही खोलूंगा।'

मराइन ने कहा,'चाहे मैं भारतीय महिला टीम का हॉकी उस्ताद रहा या फिर हरेन्द्र सिंह, महिला हॉकी टीम का 'स्ट्रक्चर' और 'गेम प्लान' बरकरार रहा। स्ट्रक्चर का मतलब तकनीक के साथ रणनीतिक रूप से मैच के मिजाज के मुताबिक खेलना। 

अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में कामयाबी के लिए डॉज जैसे वैयक्तिक कौशल का रणनीतिक रूप से सही वक्त पर इस्तेमाल किसी भी टीम की कामयाबी के लिए जरूरी है। आपके पास बतौर खिलाड़ी जो 'कलाकारी' है उसका सही वक्त पर इस्तेमाल कर प्रतिद्वंद्वी टीम के किले को भेदने की कला किसी भी टीम की कामयाबी के लिए जरूरी है।

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