सरदार सिंह की 'सरदारी' में भारतीय हॉकी वाकई पटरी पर लौट रही है। भारत का विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में करारी शिकस्त दे उसका दंभ तोड़ चार टेस्ट मैच की हॉकी सीरीज 3-1 से जीतना यही दर्शाता है। आलोचक भले ही इस जीत को खास तवज्जो न दें लेकिन यह जीत भारतीय हॉकी के लिए वाकई बहुत अहम हैं।
भारत की यह जीत बहुत कुछ कहती है। अगले महीने भुवनेश्वर में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी से पहले मिली यह जीत कहती है कि सरदार और ऑस्ट्रेलियाई हॉकी उस्ताद टैरी वॉल्श की जुगलबंदी में भारत अब ऑस्ट्रेलिया और सरीखी जर्मनी, नीदरलैंड, अर्जेंटीना और बेल्जियम सरीखी टीमों को जवाब देने का दम दिखाती नजर आती है।
भारत की इस जीत को 'तुक्का' कह कतई खारिज नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए है चूंकि ऑस्ट्रेलिया के लिए इस सीरीज में उसके जेरमी हेवर्ड, जैकब व्हिटन और मैट गोडस जैसे सभी धुरंधर स्ट्राइकर खेले। ऑस्ट्रेलिया के लिए भारत के खिलाफ दो गोल पहले मैच में हेवर्ड ने ही किए।
रोल में आ रहे हैं खिलाड़ी
भारत की इस जीत में युवा स्ट्राइकर आकाशदीप सिंह और अनुभवी एसवी सुनील के जुगलबंदी के साथ दो-दो गोल यह दर्शाते हैं कि वे अब चैंपियंस ट्रॉफी के बड़े 'इम्तिहान' के लिए तैयार हैं। भारत की परेशानी है बस यह है कि उसके ड्रैग फ्लिकरों- रूपिंदर पाल सिंह और वीआर रघुनाथ के साथ गुरजिंदर एक भी पेनल्टी कॉर्नर को गोल में नहीं बदल पाए।
रक्षापंक्ति में रुपिंदर के साथ बीरेंद्र लाकड़ा, गुरबाज और कोथाजीत ने भारत का किला मुस्तैदी से संभाला। सरदार के साथ दानिश मुज्तबा, धर्मवीर के रूप में मजबूत मध्यपंक्ति है।
ऑस्ट्रेलिया को हेग (नीदरलैंड) में इसी साल विश्व कप जिताने में अहम रोल निभाने वाले चीफ कोच रिक चाल्र्सवर्थ ने मुझसे बातचीत में कहा था उनके पास इतने ही प्रतिभा सम्पन्न दो दर्जन खिलाड़ी हैं जो कि मौजूदा टीम में किसी की भी जगह ले सकते हैं। इसमें तब रिक का दंभ झलका था। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हरा उसका यह दंभ तोड़ा है। तबका उनका यह आकलन जरूर सही साबित हुआ कि भारत अपनी मौजूदा टीम को बरकरार रखेगा वह जरूर जल्द नतीजे देगी।
पलटवार करना सीख गई है टीम
सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने चार टेस्ट की इस सीरीज में कुल छह-छह गोल किए। इसके बावजूद जीत भारत के हिस्से इसलिए आई क्योंकि वह पलटवार करने का शउर तेजी से सीख रहा है। भारत ने पहला टेस्ट मेजबान टीम से 0-4 से गंवाने के बाद जीत की 'हैट-ट्रिक' लगाकर यह दर्शाया उसे अब पलटवार करना आ गया है।
'ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में जाकर हराना एक बड़ी जीत है। पहले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत, फिर एशियाड में स्वर्ण और अब ऑस्ट्रेलिया से टेस्ट सीरीज जीतना यह दर्शाता है कि भारतीय हॉकी टीम अब निरंतर बढिय़ा प्रदर्शन करना सीख गई है। हाल ही तक भारतीय टीम की बड़ी कमजोरी यही थी कि वह निरंतर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती थी। आकाशदीप जैसे यंग स्ट्राइकर ने टूर्नामेंट दर टूर्नामेंट अपना प्रदर्शन निखारा है।'
---जगबीर सिंह, पूर्व हॉकी ओलंपियन