रानी कहती हैं, 'दक्षिण कोरिया में महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में रजत पदक जीतने से हमारी टीम के हौसले बुलंद हैं। एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के बाद बेंगलुरू में शिविर में सबसे ज्यादा जोर पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदलने पर दिया है। हमारी खिलाड़ी मैदानी गोल करने के खूब मौके बनाने के बावूजद सभी को भुना नहीं पा रही थी। हमने मैदानी गोल के मौके बनाने के साथ इनमें अधिकतम को गोल में बदलने के लिए 'डी' के भीतर अपनी निशानेबाजी और अचूक करने पर काफी मेहनत है। स्पेन दौरे पर मेरे साथ फुलबैक सुशीला चानू ने भी वापसी की और एशियाई महिला चैंपियंस ट्रॉफी में शिरकत करने वाली सभी 18 खिलाडियों के साथ हमारी 20 सदस्यीय स्पेन जाएगी। इससे सभी खिलाडिय़ों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर विश्व कप और एशियाई खेलों के लिए अपनी मजबूत दावेदारी का मौका मिलेगा।'
वह बताती हैं, 'कोचों की अदला बदलली के बाद हरेन्द्र सर से मराइन सर के एक बार फिर भारतीय महिला हॉकी टीम कोच की जिम्मेदारी संभालने की बात तो एक बात साफ कर दूं कि कोई पहली दफा तो कोच नहीं बदले गए हैं। हमारी लड़कियां पूरी तरह फोकस हैं और खुद को मराइन सर की रणनीति के मुताबिक ढाल कर अपना सर्वश्रेष्ठ देने को तैयार हैं। हम सभी लड़कियों की पूरी कोशिश यह है कि हम एकाग्र होकर भारत के लिए बेहतर प्रदर्शन कर उसे उसके लक्ष्य को हासिल कराने में साझीदार बनें। पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने के लिए गुरजीत कौर, सुनीता लाकड़ा और यहां तक मैं भी खुद भी ड्रैग फ्लिक से और यहां तक इनडायरेक्ट गोल करने की कोशिश कर रही हैं। हमारे कोच मराइन सर दरअसल यह चाहते हैं कि महिला विश्व कप और एशियाई खेलों में हमारी सभी खिलाड़ी पूरी तरह तरोताजा रहे और इसीलिए वह बराबर खिलाडिय़ों को हर टूर्नामेंट और मैचों में रोटेट कर रहे हैं यानी बारी-बारी से मौका दे रहे हैं।'