हालांकि अधिकारी ने कहा कि पोवार ने बताया कि मिताली को सेमीफाइनल से बाहर करना बदले की भावना नहीं बल्कि रणनीति का हिस्सा था। इंग्लैंड ने इस मैच में भारत का आठ विकेट से हराया था। अधिकारी ने कहा, ''उन्होंने कहा कि खराब स्ट्राइक रेट के कारण उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ मैच से बाहर किया गया। इसके अलावा टीम प्रबंधन पिछले मैच में जीत दर्ज करने वाली टीम को बरकरार रखना चाहता था। ''
पोवार से पूछा गया कि आयरलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मैचों में मिताली का स्ट्राइक रेट आड़े क्यों नहीं आया तो इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था। मिताली ने इन दोनों मैचों में अर्धशतक जमाये और उन्हें प्लेयर आफ द मैच चुना गया।
इसके अलावा इस पर भी चर्चा हुई कि क्या मिताली को बाहर करने के लिये किसी प्रभावशाली अधिकारी का बाहरी दबाव था। सूत्रों ने बताया कि पोवार ने किसी का फोन आने का खंडन किया लेकिन दावा किया कि वह इससे अवगत थे कि 'बीसीसीआई का प्रभावशाली व्यक्ति' टीम मैनेजर (तृप्ति भट्टाचार्य) और दौरे की चयनकर्ता (सुधा शाह) के संपर्क में था।
मिताली ने बुधवार को प्रशासकों की समिति की सदस्य डायना एडुल्जी पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। वनडे टीम की कप्तान ने कहा कि एडुल्जी ने उनके खिलाफ अपने पद का उपयोग किया। एडुल्जी ने अभी तक मिताली के आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। 40 वर्षीय पोवार का अंतरिम कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो जाएगा।